नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दुष्कर्म व जान से मारने की धमकी देने के मामले में विदेशी महिला के बयानों को संदेह के दायरे में लेते हुए आरोपी शब्बीर डंडू को जमानत प्रदान कर दी। वहीं उसके भाई फरुख डंडू को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि घटना के तीन वर्ष तक पीड़िता ने आरोपी पर दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं लगाया और बाद में अचानक आरोप लगा दिया।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता पेशेवर रूप से परिपक्व कारोबारी महिला है जिसने 2016 से 2019 की अवधि के दौरान न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर यात्रा की है। वह कई बार नियमित रूप से अपने मूल देश जाने की बात कह चुकी है। इस दौरान शिकायतकर्ता का आवेदक के साथ व्यावसायिक लेन-देन भी जारी रहा।
उन्होंने कहा कि महिला ने पुलिस आयुक्त को किए ईमेल और पहाड़गंज के थानाध्यक्ष को दी शिकायत में पहले ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया बल्कि व्यावसायिक विवाद का ही तर्क रखा। कोर्ट ने कहा मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। महिला ने बाद में जांच अधिकारी को भी पत्र लिखकर कहा कि उसने भ्रम में आरोप लगाया था और वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती।
अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों को देखने के बाद वे महसूस करते हैं कि आरोपी जमानत पाने का हकदार है। अदालत ने दोनों आरोपियों की एक लाख रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आरोपी केे पीड़िता से संपर्क न करने व बिना अदालत की इजाजत दिल्ली से बाहर जाने पर रोक लगा दी है।
महिला ने आरोप लगाया था कि 30 अप्रैल 2016 को वह दिल्ली आई थी और उसे गेस्ट हाउस न मिलने पर आरोपी ने पटेल नगर में एक होटल में कमरा दिलवा दिया। रात को खाने के बाद शराब पीने के बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया व बाद में विवाह का वायदा किया। इसके अलावा महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी के भाई ने भी दुष्कर्म का प्रयास किया व उसके पिता ने भी छेड़छाड़ की।
वहीं आरोपी के वकील ने कहा कि यह मामला मात्र व्यवसायिक विवाद का है। घटना 2016 की है और महिला ने प्राथमिकी 2019 में लिखवाई है। उन्होंने कहा महिला वर्ष 2016-19 के दौरान भी उनके मुवक्किल से व्यवसाय में लगी रही है। पुलिस को दी शिकायत में व्यवसाय का विवाद ही बताया। फिर अचानक 9 नवंबर 19 को दुष्कर्म का मामला दर्ज करवा दिया।