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दिल्ली दंगो के आरोपी के खिलाफ अभियोग तय

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नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली दंगों सिलसिले में आरोपी नूर मोहम्मद के खिलाफ दंगा, लूटपाट, आगजनी के अभियोग तय किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेश साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गवाहों के बयानों को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता है क्योंकि उन्हें दर्ज करने में देरी हुई है। इसके अलावा अदालत ने आरोपी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने शुरू में दी शिकायत में उसका नाम नहीं लिया।
अदालत ने कहा स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आरोप तय करने के स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने चश्मदीद गवाहों के बयानों को स्वीकार करते हुए कहा आंखों देखे साक्ष्य को सबसे अच्छा सबूत माना जाता है, जब तक कि इस पर संदेह करने के लिए मजबूत कारण न हों।
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नूर मोहम्मद के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों के आधार पर तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इनमें आरोप लगाया गया कि दंगाइयों ने शिकायतकर्ताओं की दुकानों में आपराधिक रूप से प्रवेश किया और लूटपाट के बाद में उनमें आग लगा दी गई। इस से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
आरोपी के खिलाफ दंगा, घातक हथियार से लैस होने, गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने, लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा, डकैती, आग लगाने इत्यादि धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए अभियोग तय किए गए हैं।
आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को उक्त मामलों में झूठा फंसाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने अपनी प्रारंभिक शिकायतों में विशेष रूप से उसका नाम नहीं लिया और न पहचान की थी। उन्होंने कहा कथित रूप से दंगाई भीड़ का हिस्सा होने वाले 150-200 लोगों में से केवल नूर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह भी कहा गया कि जांच एजेंसी मामले में किसी अन्य आरोपी की पहचान करने में असमर्थ है। वहीं शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसी के कहने पर उनके मुवक्किल का नाम लिया।
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने कहा कि नूर दंगाइयों की भीड़ का सक्रिय सदस्य था। उसने घटना की तारीख और समय पर क्षेत्र में दंगा, तोड़फोड़ और आगजनी में भाग लिया था।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध घटना का कोई विशिष्ट सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप नहीं है। हालांकि, इस स्तर पर हमारे पास शिकायतकर्ता के पूरक बयान के रूप में स्पष्ट सबूत हैं। वहीं अधिकांश मामलों में दंगाइयों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे।
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