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दिल्ली में कोरोना : दूसरी लहर के बाद बढ़े दिल के मरीज, आशंका के मद्देनजर सरकारी तैयारी

Wed, 25 Aug 2021 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली

सार

  • पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी बढ़ गए हैं ह्रदय संबंधी बीमारियों के रोगी 
  • दूसरी लहर के बाद दिल के मरीजों की परेशानी बढ़ी, तीस फीसदी तक बढ़ गए नए रोगी
  • जानकारी के अभाव में गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे हैं मरीज, डॉक्टरों का कहना लक्षणों की पहचान जरूरी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद दिल की बीमारियों के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि अस्पतालों के कार्डियोलॉजी 

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विभाग में आने वाले मरीजों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 30 फीसदी तक की वृद्धि हो गई है। डॉक्टरों की माने तो कोविड से संक्रमित हो चुके मरीजों में यह समस्या ज्यादा हो रही है। वहीं कुछ मामले ऐसे भी हैं जहां मरीज पहले से ही दिल की बीमारी से जूझ रहे थे और कोविड के बाद हालत ज्यादा खराब हो गई। 

दिल्ली के अस्पतालों में आने वाले मरीजों को सीने में दर्द, धड़कन का बढ़ना, जी मचलना, सांस फूलना जैसी दिक्कतों का सामान करना पड़ रहा है। जांच में पता चलता है की यह मरीज दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं। इनमें एक बड़ी संख्या कोविड से ठीक हो चुके लोगों की भी है। एम्स के क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टर युद्धवीर सिंह का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद ह्रदय रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। ऐसा इसलिए भी हुआ है क्योंकि एक बड़ी आबादी कोरोना से संक्रमित हुई थी। वायरस के शरीर से निकलने के बाद इन लोगों में उसके दुष्प्रभाव हुए, जिसमें दिल की बीमारियां भी थी। 
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डॉक्टर के मुताबिक,  कोरोना पीड़ित मरीजों में दिल का दौरा पड़ने का अधिक खतरा होता है। कोरोना संक्रमित मरीज की रक्तवाहिनियों में खून के थक्के भी बन जाते हैं।  जिसकी वजह से दिल का दौरा पड़ने खतरा भी बढ़ जाता है।  हिंदूराव अस्पताल की डॉ अंकिता कुमार का कहना है कि आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जांच में डी डायमर स्तर का पता लगाते हैं। इससे रक्त के थक्के का पता चल सके। मरीजों को रिवारोक्साबेन व एपिक्साबेन सॉल्ट की दवाएं लगातार दी जा रही हैं, ताकि खून शरीर में  खून का थक्का न हो।

पांच फीसदी मरीजों को पड़ रही बाइपास सर्जरी की जरूरत
पारस अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टर अमित शर्मा ने बताया कि  पोस्ट कोविड या सामान्य मरीजों  की ह्रदय की धमनियों में खून के थक्के और नसों में ब्लॉकेज मिल रहा है। इसके इलाज के लिए  एंजियोप्लास्टी की जा रही है, जबकि पांच फीसदी गंभीर मरीजों की बाइपास सर्जरी भी करनी पड़ रही है। डॉक्टर ने बताया कि लोग दिल से जुड़ी बीमारियों को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पताल में हर सप्ताह ऐसे तीन से चार मामले आ रहे हैं, जहां गंभीर स्थिति में मरीज की सर्जरी की जा रही है। इसलिए जरूरी है की लोग ह्रदय की बीमारियों के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचान कर इलाज कराएं। 

लक्षण
डॉक्टरों की मानें तो दिल का दौरा का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है- सीने में तेज दर्द।जब दिल तक खून की आपूर्ति नहीं हो पाती तो दिल का दौरा पड़ता है.।आमतौर पर हमारी धमनियों के रास्ते में किसी तरह की रुकावट आने की वजह से खून दिल तक नहीं पहुँच पाता, इसीलिए सीने में तेज दर्द होता है. लेकिन कभी-कभी दिल के दौरे में दर्द नहीं होता. इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ, जी मचलाना आदि भी लक्षण हैं। 

तथ्यों में...

  • देश में हर साल 17 लाख लोगों की मौत दिल से जुड़ी बीमारियों से होती है।
  • देश की राजधानी दिल्ली में 40 फ़ीसदी लोग विभिन्न प्रकार की दिल की बीमारियों से ग्रस्त हैं
  • 60  फीसदी लोगों को दिल का दौरा पड़ने के बाद मालूम चलता है कि उन्हें  ह्रदय रोग से जुड़ी समस्याएं हैं
  • दिल्ली में कोरोना संक्रमित  कई  मरीजों जान बचाने के लिए पेसमेकर लगाना पड़ा

दवाओं का स्टॉक रखने का आदेश

दिल्ली सरकार ने दवा बनाने वाली सभी कंपनियों और मेडिकल स्टोर एसोसिएशन को आदेश जारी करते हुए कहा है कि वह कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखें। किसी भी समय इन दवाओं की जरूरत हो सकती है। सरकार ने कहा है कि विदशो के हालात को देखते हुए तीसरी लहर की आशंका प्रबल है। ऐसे में यह जरूरी है कि कंपनियां इन दवाओं का स्टॉक उपलब्ध रखे। 

आदेश में कहा गया है कि तीसरी लहर की आंशका के बीच सभी तैयारियां पूरी की जा रही है। इसी कड़ी में दवाओं की पर्याप्त मात्रा मौजूद रखना भी जरूरी है। जिससे संकट में समय में लोगों को कोई परेशानी न हो। फॉर्मा कंपनियों से कहा गया है कि कोविड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेमडिसिविर, टोसीलिजुमैब, एम्फोटेरिसिन बी स्टॉक रखना होगा।

इसके अलावा ब्लैक फंगस व बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को भी पर्याप्त मात्रा में रखना जरूरी है। कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा की दवाओं की काला बाजारी न होने पाए। अगर इस संबंध में किसी के खिलाफ कोई शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
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37 हजार कोविड बेड बना रही सरकार

दिल्ली सरकार कोरोना की संभावित तीसरी लहर से मुकाबले के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का कहना है कि 12 हजार आईसीयू सहित 37 हजार कोविड-19 बेड तैयार किए जा रहे हैं। आवश्यक दवाओं के साथ-साथ मेडिकल ऑक्सीजन की क्षमता को भी बढ़ाया गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी विशेष काम किया जा रहा है। 

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को कहा कि सरकार तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए सभी व्यवस्था की जा रही है। ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं के उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार कोविड की स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए अन्य राज्यों के हालातों पर भी नजर रख रही है। राजधानी में फिलहाल संक्रमण से हालात काबू में है। अगर अगली लहर आती भी है तो उससे निपटने के लिए सभी मोर्चों पर काम किया जा रहा है। हालांकि,प्राथमिकता  यह सुनिश्चित करने पर है कि दिल्ली में तीसरी लहर की स्थिति उत्पन ही न हो। इसके लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार  कही ढील नहीं छोड़ रही है। 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने का निर्देश दिया है। किसी भी कंपनी को किसी भी दवा के लिए अतिरिक्त राशि लेने का कोई अधिकार नही दिया गया है। 
 है। 

दैनिक मामलों में कमी बेहतर संकेत
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राजधानी में कोरोना से हालात काफी बेहतर हैं। दैनिक मामले कम हो रहे हैं और संक्रमण दर में भी लगातार कमी आ रही है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है। किसी भी मोर्चे पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है। 
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