राजधानी में मेट्रो और बसें सौ फीसदी क्षमता के साथ चलाने के फैसले से यात्रियों ने राहत की सांस ली है। कतार में यात्रियों को अब लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
अगर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एहतियातों के पालन में थोड़ी भी लापरवाही बरती गई तो राहत आफत में बदल सकती है। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर भी दिख सकता है। बदलते हालात को देखते हुए कुछ मेट्रो स्टेशनों के बाहर स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर यात्रियों की कोरोना जांच की जा रही है, लेकिन बस यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही है।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सार्वजनिक परिवहन की अधिक से अधिक सुविधा लोगों को मुहैया कराने के लिए क्षमता में बढ़ोतरी की घोषणा की है। मंगलवार सुबह से ही इस फैसले का बसों में असर नजर आया। केवल उन्हीं यात्रियों को प्रवेश दिया गया जिन्होंने मास्क लगा रखे थे।
क्षमता से अधिक एक भी यात्री बस में नजर आया तो उसे तत्काल उतार दिया गया। वहीं, मेट्रो में सुबह से सभी सीटों के अलावा खड़े होकर भी लोग सफर करते दिखे।
मेट्रो यात्रियों की कोरोना जांच
संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर मौजपुर, सरोजिनी नगर, निर्माण विहार, प्रीत विहार सहित कुछ और मेट्रो स्टेशन पर यात्रियों की कोरोना जांच के बाद उन्हें प्रवेश करने दिया गया। हालांकि, रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट यात्रियों को शाम तक भी नहीं मिल सकी।
600 पर्यावरण बस सेवा की मियाद 31 जनवरी तक बढ़ी
बसों में यात्रा करने के लिए लोगों को अब लंबा इंतजार नहीं करना होगा। सौ फीसदी क्षमता के साथ शुक्रवार से बसें चलने लगेंगी। लोगों को कोई परेशानी न हो, इसलिए 600 पर्यावरण बस सेवा की मियाद एक महीना बढ़ाकर 31 जनवरी तक कर दी गई है। परिवहन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए चरणों में इलेक्ट्रिक बसों के दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में शामिल होने से भी यात्रियों की मुश्किलें कम होंगी।