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सेंट्रल विस्टा: केंद्र ने हाईकोर्ट से कहा- प्रोजेक्ट से दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं

Thu, 02 Dec 2021 08:16 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि परियोजना से प्रभावित होने की संभावना वाली अपनी विरासत संपत्तियों के संरक्षण और संरक्षण की मांग करने वाली बक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी जाए। उन्होंने कहा कि एक लंबी योजना होने के नाते संपत्तियां प्रोजेक्ट की जद में नहीं हैं।
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सेंट्रल विस्टा परियोजना निर्माण कार्य - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के आसपास दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पंहुचाया जा रहा है।

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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि परियोजना से प्रभावित होने की संभावना वाली अपनी विरासत संपत्तियों के संरक्षण और संरक्षण की मांग करने वाली बक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी जाए। उन्होंने कहा कि एक लंबी योजना होने के नाते संपत्तियां प्रोजेक्ट की जद में नहीं हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि हम याची को आश्वत करना चाहते है कि इन संपत्तियों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही और उनको विश्वास करना चाहिए। एक लंबी योजना के चलते वे अदालत को आश्वत कर रहे है। ऐसे में तीन सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित की जाए।

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अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए मामले में सुनवाई 20 जनवरी तक के लिए स्थगित करते हुए कहा कि उन्हें सॉलिसिटर जनरल पर पूरा विश्वास है। उन्होंने याचिकाकर्ता की और से पेश वकील के उस तर्क को खारिज कर दिया कि सालीसीटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड पर लिया जाए। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजॉय घोष के जरिए दायर याचिका में अपनी छह संपत्तियों के संरक्षण और संरक्षण की मांग की है। याचिका में कहा है कि पुनर्विकास के काम के चलते मानसिंह रोड पर मस्जिद जब्ता गंज, रेडक्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास मस्जिद सुनेहरी बाग रोड, मोती लाल नेहरू मार्ग के पीछे मजार सुनेहरी बाग रोड इत्यादि को खतरा है।

याची ने कहा छह संपत्तियां एक साधारण मस्जिद से अधिक हैं। याचिका में कहा गया है कि न तो ब्रिटिश सरकार और न ही भारत सरकार ने कभी इन संपत्तियों पर धार्मिक प्रथाओं के पालन में कोई बाधा पैदा की जो हमेशा से संरक्षित है। वक्फ ने कहा संपत्तियां 100 साल से अधिक पुरानी हैं और लगातार धार्मिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा रही है। ऐसा नहीं है कि सरकारी इमारतों का निर्माण पहले किया गया है और उसके बाद ये संपत्तियां अस्तित्व में आईं। ये संपत्तियां तब से अस्तित्व में है जब सरकारी इमारतों का निर्माण उनके आसपास या आसपास हुआ है।
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