अंतिम संस्कार के लिए बंद किया गया श्मशान घाट
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रास्ते में यदि कहीं मिल जाए तो बिना नमस्ते बोले आगे बढ़ना उसकी आदत में नहीं था। बच्ची की हत्या के दो दिन पहले ही उससे बात हुई थी। पता नहीं था वह बातचीत का आखिरी दिन होगा। अपने बेबाक अंदाज, निडरता और बड़ों के लिए सम्मान के कारण आज भी बेटी हम लोगों के दिलों में जिंदा है। यह कहते हुए दिल्ली कैंट में दुष्कर्म और जलाने के मामले में नौ वर्षीय बच्ची की पड़ोस में रहने वाली महिला फफक पड़ी।
महिला ने बताया कि बच्ची पूरे इलाके में अपने स्वाभाव के लिए जानी जाती थी। मासूम चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान ऐसी कि कोई भी बच्ची की मासूमियत देख ठहर जाए। लेकिन, क्या पता था कि प्यारी सी मुस्कान हमेशा के लिए कहीं गुम हो जाएगी।
वहीं, मृतका के घर के नीचे रहने वाले शख्स ने बताया कि बच्ची अपने उम्र के हिसाब से बहुत समझदार थी। बच्ची को अच्छे और बुरे में का क्या अंतर होता है, यह अच्छी तरह से पता था। अरुण ने बताया कि वह इलाके में ही घूम-घूमकर भुट्टा बेचा करते हैं।
मृतका अक्सर भुट्टा खाने के लिए उन तक पहुंचती थी। उन्होंने बताया कि बच्ची की मां अक्सर नजदीक में स्थित पीर बाबा की मजार पर बैठा करती थी। ऐसे में बच्ची का सफर सिर्फ घर से पीर बाबा की मजार तक हुआ करता था। इसके अलावा बच्ची को किसी के पास खड़े नहीं देखा गया।