सराय रोहिला में रहने वाले संयुक्त वर्मा परिवार में व्यापार करने वाले, से लेकर सेवानिवृत्त, वकील, व छात्र, गृहिणी शामिल हैं। सलाना नौ लाख आय वाले इस मध्यमवर्गीय परिवार की बजट को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। आयकर स्लैब में राहत नहीं मिलने, पेट्रोल व रसोई गैस की कीमतों पर अंकुश नहीं लगने से थोड़ी मायूसी है। परिवार टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे। जैसे बजट की उम्मीद कर रहे थे वैसा नहीं है इस कारण से घर के बजट में बचत करना मुश्किल लग रहा है।
घर के मुखिया कन्हैया लाल वर्मा बैंक से सेवानिवृत हैं। वह कहते हैं कि बजट में कोविड-19 वैक्सीन केलिए काफी पैसे का प्रावधान किया गया है जो कि अच्छा कदम है। परिवार में 11 सदस्य हैं, जिसमें से पांच कॉलेज व स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। सालाना 9 लाख रुपये आय वाले इस परिवार की सलाना खर्च 6 लाख रुपये हैं। इसमें मेडिकल केखर्चे शामिल नहीं है। वह बताते हैं कि जिस तरह का बजट आया है उससे ऐसा लगता है कि बजत करना मुश्किल हो जाएगा। बजट में स्वरोजगार लोगों को और रियायत मिलनी चाहिए थी। सैलेरी क्लास के लिए इसमें कुछ नहीं है। सरकार को इस वर्ग का भी ध्यान रखना चाहिए था।
रसोई व घर का बजट संभालने वाली ममता वर्मा कहती हैं कि रसोई की वस्तुएं सस्ती होनी चाहिए थी। पेट्रोल कीमतों पर अंकुश लगना जरुरी थी। परिवार में बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है, एक बच्चे के तीन से चार घंटे मोबाइल पर व्यतीत हो रहे हैं। ऐसे में मोबाइल का प्रयोग बढ़ा है। अब बजट में विदेशी मोबाइल व चार्जर मंहगे होने की बात है तो मोबाइल का खरीदना घर के बजट पर भारी पड़ जाएगा। हालांकि बजट में सोना-चांदी सस्ता होने से परिवार इसे एक अच्छा कदम बता रहा है। इससे कम से कम सोने में निवेश करने के विषय में सोचा जा सकेगा। सरकार का यह प्रयास भी अच्छा है कि कोई बीमारी ना फैलै, यदि फैले तो उसका बेहतर इलाज हो सके।