डॉ. अनामिका
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आम बजट में की गई घोषणाओं से दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहने वाला मध्यमवर्गीय एक परिवार इस बजट में अच्छी व बुरी दोनों बातों को देख रहा है। रसोई गैस में कुछ राहत नहीं मिलने, कपड़ों और चमड़े से बने उत्पादों के दाम बढ़ने से वह ज्यादा खुश नहीं है तो वहीं बजट में स्वास्थय और शिक्षा पर ध्यान देने से वह खुश है। घर के बजट को प्रभावित करने वाली जरुरी वस्तुओं पर रियायत नहीं मिलने से उनके घर का बजट जरुर प्रभावित होगा। आम आदमी की नजर से देखें तो इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिससे कि घर के बजट से कुछ बचत की जा सके। इस बजट में उम्मीद से कम ही राहत मिली है।
परिवार चलाने वाली डॉ. अनामिका कहती हैं कि हम घर में तीन लोग पति, पत्नी व एक छोटी बच्ची हैं। वह बताती हैं कि इस बजट में जहां कुछ अच्छी बातें हैं तो कुछ ऐसी भी हैं जो घर के बजट को प्रभावित कर सकती हैं। डॉ. अनामिका के अनुसार अब तक हर माह घर के खर्चे व घर का किराया जोड़ कर औसतन 50 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। घर की आय में उस तरह से बढ़ोतरी नहीं हुई है जिस तरह से खर्चे बढ़ते जा रहे हैं। बजट से उम्मीद थी कि एक मध्यमवर्गीय परिवार को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन इसमें ऐसा कुछ खास नहीं है।
परिवार इस बात से खुश है कि सरकार ने बजट में स्वास्थय और शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया है। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह दोनों ही प्राथमिकताएं होती हैं। बजट में रसोई गैस, पेट्रोल के दाम में कुछ राहत नहीं मिली है। वहीं एक परिवार कपड़ों पर भी खर्च करता है यदि कपड़ों के दाम और चमड़े के उत्पाद महंगे होंगे तो इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ेगा। हालांकि वह इस बात से खुश हैं कि सरकार ने 100 सैनिक स्कूल खोलने का प्रावधान किया है। इससे ज्यादा छात्रों को सैनिक स्कूल में पढ़ने का अवसर मिलेगा।
वहीं कोविड वैक्सीन पर ज्यादा खर्च होने से इसका लाभ लोगों को ही मिलेगा। सोना-चांदी खरीदना हर मध्यमवर्गीय परिवार खरीदना चाहता है, बीते कई माह से तो इनके दाम आसमान छू रहे थे। अब जबकि बजट में इनके सस्ते होने की बात है तो यह एक अच्छा कदम है। वह इस बात से खुश नहीं है कि सरकार काफी चीजों का निजीकरण करने का सोच रही है।