नोट : उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के लिए भी.....
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दिलशाद गार्डन में भाई-बहन ने की आत्महत्या
सीमापुरी थाना क्षेत्र में किराये के फ्लैट में रहते थे दोनों, पड़ोसियों को दुर्गंध आने पर मामला खुला
पुलिस को शक, दोनों भाई-बहन थे अवसाद में, कई साल से दोनों ने रिश्तेदारों से बनाई हुई थी दूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुनापार के दिलशाद गार्डन स्थित फ्लैट में भाई बहन ने फंदा लगाकर जान दे दी। फ्लैट से दुर्गंध आने पर मामला सामने आया। पड़ोसियों और फ्लैट मालिक की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए जीटीबी अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया है। उनकी शिनाख्त वीरेश (32 ) तोमर और चिंकी तोमर (30 ) के तौर पर हुई है। पुलिस को शक है कि दोनों ने अवसाद में रह कर आत्महत्या करने जैसा कदम उठाया। फिलहाल शाहदरा जिले की सीमापुरी थाना पुलिस मृतकों के मोबाइल फोन जांच के लिए भेजा है।
डीसीपी प्रशांत गौतम के अनुसार, वीरेश और चिंकी दिलशाद गार्डन के डी-409 फ्लैट में साल 2021 से साथ रह रहे थे। तीन दिन का अखबार बाहर पड़ा मिला, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तीन दिन से कोई भी फ्लैट से बाहर नहीं निकला। इससे ये भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि तीन दिन पहले ही दोनों ने आत्महत्या कर ली थी। रविवार सुबह जब दुर्गन्ध बहुत बढ़ गई तब पड़ोसियों और फ्लैट मालिक ने पुलिस को पीसीआर काॅल की। पुलिस टीम को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला हैै।
माता पिता की हो चुकी है मौत, रिश्तेदारों से नहीं था कोई संपर्क
वीरेश मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित फतेहपुर चक गांव के रहने वाले थे। पिता देवेंद्र कुमार आर्मी में जूनियर कमीशन अफसर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और 2011 उनकी मौत हो गई थी। वहीं मां अनीता की वर्ष 2021 में मौत हो गई थी। चचेरे भाई विजय तोमर ने बताया कि वीरेश व चिंकी ने माता-पिता की मौत के बाद गांव छोड़ दिया था। वीरेश निजी कंपनी में नौकरी करते थेे वहीं चिंकी एमबीए की पढ़ाई कर रही थी। वह परिवार के सदस्यों से बात नहीं करते थे। डेढ वर्ष पहले गांव से उन्हें शादी का कार्ड भेजा गया था, लेकिन दोनों ने आने से मना कर दिया था।
डेढ़ माह से नहीं दिया था किराया
बताया जा रहा है कि जिस फ्लैट में दोनों भाई-बहन रह रहे थे। उन्होंने फ्लैट मालिक राजीव को बीते डेढ़ माह से किराया नहीं दिया था। पुलिस के अधिकारी ने बताया कि मृतकों के बैंक खातों की जानकारी की जा रही है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई आर्थिक तंगी तो नहीं थी।