सिविल सेवा की तैयारी के लिए मुखर्जी नगर और पुराने राजेंद्र नगर इलाके में पेइंग गेस्ट (पीजी) की व्यवस्था होने पर छात्र-छात्राओं का अगला पड़ाव कोचिंग सेंटर होता है। कदम-दर-कदम पर स्थित छोटे-बड़े हजारों कोचिंग सेंटर सपनों को पंख लगाने का दावा करते नजर आ जाएंगे। निजी लाइब्रेरियां भी रातभर रोशन होने के लिए कम दामों में बेहतर सुविधा की दौड़ में हैं। हालांकि, कोरोना महामारी के बाद से यहां की पढ़ाई को भी डिजिटल कर दिया गया है। अब ब्लैक बोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड और मोटी-मोटी किताबों की जगह पेन ड्राइव ने ले ली है। या यूं कहें कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहले पाठशाला जाना होता था, लेकिन अब ऑनलाइन माध्यम से गुरुजी स्वयं ही घर पहुंच जाते हैं।
स्मार्ट बोर्ड की मदद से छात्रों को भूगोल, इतिहास व अन्य विषयों से जुड़े तथ्यों को आसानी से समझाया जाता है। इससे शिक्षकों के साथ प्रतियोगी छात्रों के समय
की भी बचत होती है।
- गौरव बाना, डिविजनल प्रमुख, निजी कोचिंग सेंटर
कोरोना के बाद से कोचिंग संस्थानों को पढ़ाई के हाईब्रिड करने का अवसर प्रदान किया है। इसके लिए अलग-अलग टीमों को तैयार किया गया है, जो बच्चों की
तैयारी करने में मदद करती हैं।
- संदीप, कोचिंग काउंसलर, निजी कोचिंग सेंटर
छात्रों ने कहा...
पहले के मुकाबले अब पढ़ाई में काफी बदलाव हुए हैं। कुछ विषयों में उच्च तकनीक का काफी लाभ देखने को मिलता है। इससे विषयों के तथ्यों को लंबे समय तक
याद रखने में मदद मिलती है।
- अविनाश, मधेपुरा (बिहार)
कोचिंग सेंटरों द्वारा हाईब्रिड मोड में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने से कोर्स जल्दी पूरा हो जाता है। इससे परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक समय मिल जाता है। पढ़ाई के