अदालत ने अनामी को दोनों संस्थाओं की वेबसाइट से ऐसी सामग्री को भी हटाने के निर्देश दिए जो केवीआईसी की वेबसाइट से मिलती-जुलती है। खादी डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (केडीसीआई) पर आरोप है कि वह फैशन डिजाइनरों को खादी प्रमाणपत्र देने की ऐवज में उनसे प्रति व्यक्ति दो हजार रुपये वसूल रहा था। केडीसीआई पर यह भी आरोप है कि उसने केवीआईसी के प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से भी जुड़े होने का दावा किया था।
अदालत ने केवीआईसी की दलील पर संज्ञान लेते हुए ने कहा कि प्रथम दृष्टया वादी केवीआईसी ने अपने पक्ष में मामला साबित किया है। इसके कारण वादी को अपूरणीय क्षति हुई है। अगले आदेश तक दूसरे पक्ष को ट्रेडमार्क 'खादी' के तहत निर्माण, विज्ञापन या किसी भी प्रकार की वस्तुओं या सेवाओं को प्रदान करने से प्रतिबंधित किया जाता है। इसके अलावा उसे सोशल मीडिया ऐप इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर संस्था के सभी अकाउंट से खादी नाम हटाने के भी निर्देश दिए जाते हैं।
अदातल ने साथ ही उसे वेबसाइट से ऐसी सामग्री को भी हटाने के निर्देश दिए हैं जो केवीआईसी की वेबसाइट से मिलती-जुलती है। गौरतलब है कि इस वर्ष मार्च में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक संस्था को अपने उत्पाद बेचने के लिए खादी नाम और चर्खा के प्रतीक का इस्तेमाल करने से रोका था।