हाईकोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव ने सरकार के कोरोना टीकाकरण अभियान को प्रोत्साहित किया था। उन्होंने किसी को भी टीके के लिए अस्पताल जाने से नहीं रोका। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए कहा भले ही उन्होंने कोराना के इलाज के लिए अपने कोरोनिल का प्रचार किया हो।
अदालत बाबा रामदेव के खिलाफ एलोपैथी को लेकर कथित रूप से दिए आपत्तिजनक बयान के मामले में सुनवाई कर रही है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर तय की है।
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत वर्तमान में इस मुद्दे पर नहीं जा रही कि प्रचार संबंधी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि बाबा रामदेव ने ऐलोपैथी पर आपत्तिजनक बयान दिया है। अदालत ने कहा उनका दिया गया बयान आपत्तिजनक है या नहीं, इस पर विचार किया जाना है, लेकिन उन्होंने लोगों से कोरोनील दवा लेने को कहा है। साथ ही कहा था कि इससे आक्सीजन लेवल सही हो जाएगा। बाबा रामदेव ने किसी के अधिकार का हनन नहीं किया है। आप उनके विचार से सहमत हैं तो अनुसरण करें अथवा छोड़ दें।
इससे पहले कोर्ट ने बाबा रामदेव को ऐलोपैथी के खिलाफ व कोरोनील के पक्ष में किसी तरह का बयान देने से मना कर दिया था।
याचिकाकर्ता रेसिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन ने याचिका दाखिल कर कहा है कि बाबा रामदेव ऐलापैथी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं। साथ ही अपने कोरोनिल का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उन्हें ऐसा करने से रोका जाए। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि दवा का लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे अपने कोरोनिल दवा का प्रचार कर रहे हैं।