राजधानी में कानून व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना बेहद गंभीर हैं। पुलिस आयुक्त के रूप में पदभार संभालने के बाद इसका नमूना दिखने भी लगा है। पुलिस आयुक्त बहुत ही बारीकी से कानून व्यवस्था पर नजर रखे हुए हैं। ताजा मामले में ख्याला और राजौरी गार्डन के थाना प्रभारियों समेत दस जवानों पर कार्रवाई की तलवार चली है। चार पुलिस जवानों को निलंबित कर दिया गया है जबकि चार को लाइन में भेजने के अलावा दोनों ही थाना के प्रभारियों से जवाब तलब किया गया है।
आरोप है कि राजौरी गार्डन व ख्याला में बदमाश खुलेआम अवैध शराब बेचने के अलावा सट्टे समेत दूसरी गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त थे। इसकी जानकारी थाना प्रभारी समेत उस बीट पर तैनात जवानों को थी। इनकी साठगांठ से अवैध कारोबार चल रहा था। पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल ने इसे संगठित अपराध की श्रेणी में मानते हुए थाना प्रभारियों ने एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
मामला नंबर एक
राजौरी गार्डन में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक घर के बाहर खड़े होकर शराब खरीद रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस उपायुक्त ने मामले की जांच की जिम्मा पश्चिम दिल्ली के एसीपी विजलेंस को सौंपा। जांच में यह बात सामने आई कि बीट संख्या 6 के घोषित बदमाश रणधीर और श्याम कुमार अवैध शराब व जुए में लिप्त हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन इससे पहले इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। जांच में पाया गया कि इन अवैध गतिविधियों को रोकने में थाना प्रभारी समेत बीट पर तैनात पुलिसकर्मी विफल रहे। जांच रिपोर्ट आने के बाद लापरवाही बरतने वाले बीट पर तैनात चार पुलिसकर्मी एएसआई देवेंद्र, हवलदार सुरेश, सिपाही पवन और पवन को निलंबित कर दिया गया। जबकि थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा को लापरवाही बरतने के लिए जवाब तलब किया है।
मामला नंबर दो
इसी तरह से ख्याला इलाके में 12 अगस्त को फायरिंग की घटना हुई थी। जिसमें पुलिस ने हत्या का प्रयास का मामला दर्ज किया था। पुलिस उपायुक्त ने इस मामले की एसीपी विजलेंस से जांच करवाई। जिसमें खुलासा हुआ कि बीट नंबर दो में रहने वाला अमित अपनी पत्नी के साथ जुआ अड्डा और अवैध शराब की बिक्री की अवैध गतिविधियों में लिप्त है। जांच में यह बात भी सामने आई कि बीट पर तैनात पुलिसकर्मियों को इस अवैध गतिविधियों की जानकारी थी लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। साथ ही इस मामले में थाना प्रभारी भी ध्यान नहीं दिया और कार्रवाई न करते हुए लापरवाही बरती। इस रिपोर्ट के बाद हवलदार नवीन, सिपाही देवेंद्र, संजीव और प्रदीप को लाइन हाजिर कर दिया गया और थाना प्रभारी को सात दिन के भीतर इस लापरवाही के लिए जवाब तलब किया है।