छानबीन हुई तो घर से मिले रजिस्टरों ने सामूहिक हत्याकांड से पर्दा उठा दिया। इस मामले को सुलझाने के लिए मनोवैज्ञानिकों के अलावा तमाम एक्सपर्ट का सहारा लिया गया। जांच के दौरान पता चला कि परिवार बेहद मिलनसार और धार्मिक था। घर में एक बेटी की शादी होने वाली थी। चंद रोज पहले उसकी मंगनी का कार्यक्रम भी हुआ था।
आगे शादी की तैयारियां भी चल रही थीं। ऐसे में कोई सामूहिक आत्महत्या कैसे कर सकता था। घर के मंदिर में रजिस्टर और परिजनों के मोबाइल बंद थे। इन सभी शवों से अलग घर की मुखिया महिला नारायण देवी का शव दूसरे कमरे से बरामद हुआ था। रजिस्टर के हिसाब से उनकी राइटिंग का मिलान भी करवाया गया।
घर में चुंडावत परिवार की 77 वर्षीय नारायण देवी, उनके बेटे भवनेश भाटिया, ललित भाटिया, इनकी पत्नियां सविता और टीना, बेटी प्रतिभा और पोता, पोती, नाती प्रियंका, नीतू, मोनू, ध्रुव और शिवम के शव मिले थे। रजिस्टरों में लिखा था कि मरे हुए पिता के कहने पर मोक्ष प्राप्ति के लिए परिवार ने ऐसा अनुष्ठान किया है। छानबीन के बाद इस मामले को आत्महत्या का मानकर इसकी जांच को बंद कर दिया गया था।