दिल्ली जल बोर्ड की ओर से यह तर्क दिया गया कि भूमि उसकी है, इसलिए एसोसिएशन को उक्त भूमि पर अपना थोक व्यापार करने के लिए कब्जा जारी रखने का कोई निहित अधिकार नहीं है। बोर्ड ने कहा जल शोधन संयंत्र से लगभग 14-15 लाख की आबादी की सेवा करने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर एसोसिएशन ने तर्क रखा कि बहादुरगढ़ झरोदा रोड पर विक्रेताओं के बैठने से न केवल उनके लिए बल्कि बड़े पैमाने पर जनता के लिए भी गंभीर मुश्किलें पैदा होंगी क्योंकि इससे सड़क पर गंभीर भीड़ हो जाएगी, जिसमें बीच में एक डिवाइडर भी है। जहां करीब तीन हजार टन फल व सब्जियां प्रतिदिन आती है।
एसोसिएशन के सदस्यों से मुख्य सचिव बैठक कर निकाले समाधान
अदालत ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को उक्त एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और अन्य सभी संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक तय करने का निर्देश दिया ताकि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जा सके। पीठ ने कहा बैठक अगले दस दिनों में आयोजित की जाएगी जिसके लिए अपीलकर्ता एसोसिएशन को उनके वकील के माध्यम से नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही पीठ ने यह स्पष्ट किया कि भूमि खाली करने के लिए अपीलकर्ता को दी गई समय सीमा अंतिम है। यह बैठक के परिणाम के अधीन नहीं है। और अपीलकर्ता बैठक के परिणाम से संतुष्ट हैं या नहीं, वे किसी भी स्थिति में वर्तमान में अपने कब्जे वाले क्षेत्र को खाली करेंगे। पीठ ने दिल्ली सरकार को एसोसिएशन के सदस्यों को बहादुरगढ़ झरोदा रोड पर स्थानांतरित करने के आदेश में जारी निर्देशों को लागू करने का भी निर्देश दिया।