सब्जी मंडी इलाके में रॉबिन सिनेमा रोड पर 60 फीसदी मकान आजादी के पहले बने हैं। मल्कागंज वार्ड में स्थित इन मकानों को उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक होने का नोटिस दे रखा है। बावजूद इसके इनमें लोग रहते हैं। अब सवाल ये उठता है कि जब निगम ने इन मकानों को खतरनाक घोषित कर रखा है, तो इनमें लोग कैसे रह रहे हैं। अगर प्रशासन के मना करने के बावजूद लोग इनमें रह रहे हैं, तो इसके खिलाफ प्रशासन ने क्या ऐक्शन लिया। फिलहाल प्रशासन और लोगों के ढुलमुल रवैये के कारण सोमवार को कई लोगों की जान चली गई।
रॉबिन सिनेमा रोड पर ब्रिटिश शासन काल में सब्जी मंडी थी। बाद में यहां से मेन सब्जी मंडी उठकर आजादपुर चली गई। यहां की स्थानीय सब्जी आज भी यहीं पर लगती है। पुरानी दिल्ली के इस इलाके में बड़े स्तर पर शर्राफा व्यवसाय आज भी यहां पर होता है। इस रोड पर करीब एक किलोमीटर लंबाई में बनाए गए पुराने मकानों को देखकर तुरंत समझ में आ जाता है कि ये अब रहने के काबिल नहीं हैं। लेकिन जर्जर बहुमंजिला भवनों में ऊपर लोग रहते हैं, नीचे किराए पर दुकानें उठा रखी हैं या खुद दुकानें खोल रखी हैं।
कई मकान ऐसे जो कभी भी गिर सकते हैं
यहां पर कई मकान ऐसे हैं, जिनकी जर्जर हालत देखकर ऐसा लगता है कि वह कभी भी गिर सकते हैं। घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय विधायक दिलीप पांडे ने बताया कि करीब 10-12 मकान ऐसे हैं, जिनके आस-पास खड़े होने में भय लगता है। यह कभी भी गिर सकते हैं, लेकिन इनमें लोग रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे ही दिल्ली में करीब 1100 बिल्डिंग हैं जो कभी भी गिर सकती हैं, बिल्डिंग विभाग के पास इसका डाटा उपलब्ध है।
पहले प्रसिद्ध हलवाई की दुकान थी
सोमवार को जो मकान गिरा पहले वह सुप्रसिद्ध लक्ष्मण दास हलवाई की दुकान थी। करीब 15 दिन पहले मल्कागंज के ही स्थानीय निवासी राजेन्द्र अरोड़ा ने लक्ष्मणदास हलवाई के बेटों से यह जगह खरीद लिया था। वो इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स का काम शुरू करना चाहते थे।
देर तक नहीं मिली निगम से मदद
जब बिल्डिंग गिरी तो स्थानीय पार्षद गुड्डी देवी तत्काल मौके पर पहुंच गई थीं। उन्होंने बताया कि जेसीबी मशीनों के लिए उन्होंने उत्तरी निगम आयुक्त संजय गोयल को 10-12 बार लगातार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। पार्षद ने बताया कि निगम के स्थानीय डीसी और एडीसी ने कहा कि उनकी जेसीबी में डीजल नहीं है। तब उन्होंने स्थानीय विधायक दिलीप पांडे से मदद मांगी।
विधायक ने एनडीआरएफ को दुर्घटना की सूचना दी, तब जाकर टीम मौके पर पहुंची और बचाव राहत कार्य शुरू हो पाया। पुलिस को भी तत्काल फोन किया गया था, लेकिन डेढ घंटे के बाद पुलिस आई। बाद में निगम के डीसी, एडीसी सब मौके पर आए। उत्तरी निगम के महापौर राजा इकबाल सिंह और पूर्व महापौर जयप्रकाश भी मौके पर पहुंचे।
इस क्षेत्र में जितनी भी जर्जर बिल्डिंगें हैं हमने सभी को नोटिस दे रखा है। इसके बावजूद भी इनमें लोग रह रहे हैं। सोमवार को जो भवन गिरा उसके मालिक ने भवन जर्जर होने के बावजूद इसे रीकंस्ट्रक्शन करवा रहा था। निगम से कोई परमिशन उन्होंने नहीं ली थी।
- राजा इकबाल सिंह, महापौर, उत्तरी दिल्ली नगर निगम