आरएमएल अस्पताल में चिपका पहचान पत्र अनिवार्य होने का सर्कुलर
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अगर आप रात में नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में उपचार लेने जाते हैं तो रुकिए, पहले आप ये जांच लें कि आपके पास मरीज का पहचान पत्र है या नहीं। क्योंकि आरएमएल अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जांच के बाद भर्ती होने के लिए मरीज का पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। ये वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड इत्यादि हो सकता है। बगैर इसके काउंटर नंबर-2 पर मौजूद कर्मचारी फाइल नहीं बना सकेगा। बीते 1 फरवरी से अस्पताल के चिकित्सा अभिलेख विभाग एवं प्रशिक्षण केंद्र का यह फैसला उन मरीजों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है, जो अस्पताल जल्दी पहुंचने के चक्कर में पहचान पत्र के बारे में सोचते तक नहीं हैं।
कुछ इसी तरह का मामला सोमवार रात को देखने को मिला। जहां एक युवक अपने पिता को भर्ती कराने के लिए कभी डॉक्टर तो कभी काउंटर के चक्कर लगा रहा था। पूछताछ में युवक ने पूरी कहानी बयां की। पूर्वी दिल्ली निवासी 35 वर्षीय युवक ने अपनी पहचान उजागर नहीं करते हुए बताया कि उसके पिता को सोमवार रात करीब 11 बजे अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया। करीब दो से ढाई घंटे तक माथापच्ची के बाद डॉक्टर ने काउंटर नंबर-दो पर जाकर फाइल बनवाने को कहा।
लेकिन काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने बगैर पहचान पत्र फाइल बनाने से साफ इंकार कर दिया। करीब एक घंटे तक भागदौड़ के बाद अंत में डॉक्टर के कहने पर उन्होंने कर्मचारी से कहा कि मरीज गंभीर है। फाइल नहीं बनी तो उनको इलाज नहीं मिलेगा। इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी। इसके बाद कर्मचारी ने उक्त युवक से एक कागज पर गारंटी लिखवाकर फाइल बना दी। सवाल उठता है कि जब गारंटी लेनी ही थी तो पहले क्यों नहीं ली? क्यों मरीज को बार-बार भटकने पर मजबूर किया गया। अगर नियम है तो इसके बारे में डॉक्टर पहले क्यों नहीं बताते? क्यों आपातकालीन विभाग के मुख्य द्वार पर ये नोटिस अंकित नहीं है?
फोन पर पहचान पत्र मंगाने से चल सकता है काम
अस्पताल प्रबंधन के सूत्र बताते हैं कि जिन मरीजों का पहचान पत्र नहीं होता, उनका फोन पर व्हॉट्सएप के जरिए पहचान पत्र मंगाने के लिए कहा जाता है। अगर मरीज पुरुष है तो उसके बेटे का पहचान पत्र भी लग सकता है। फोन पर मंगाए पहचान पत्र के आधार पर अस्पताल में प्रवेश देने से पहचान पत्र के सत्यापन पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
डॉ. वीके तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक, आरएमएल अस्पताल का कहना है कि, चिकित्सा अभिलेख विभाग ने ये सर्कुलर चस्पा किया था। हालांकि, इसके पीछे मरीजों की सही जानकारी के साथ रिकॉर्ड बरकरार रखना है। कई बार मरीज गलत नाम बता देते हैं। पहचान पत्र नहीं होने पर भी इलाज मिलता है। फिर भी सर्कुलर को वापस ले लिया जाएगा।
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