एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने दिल्ली टू मेरठ हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। अगर इस प्रोजेक्ट पर काम समय से चला तो 2021 में यह ट्रेन दौड़ने लग जाएगी। यह ट्रेन दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से चलकर गाजियाबाद होते हुए मेरठ के पल्लवपुरम तक 90 किलोमीटर की दूरी 45 मिनट में तय करेगी।
खास बात यह भी होगी कि यमुना नदी के नीचे सुरंग बनाई जाएगी, जिससे ट्रेन गुजरेगी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के 90 किलोमीटर में महज नौ किलोमीटर का हिस्सा दिल्ली में आ रहा है।
50 किलोमीटर गाजियाबाद और बाकी का हिस्सा मेरठ में आएगा। यह ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से आनंद विहार होते हुए वैशाली मेट्रो स्टेशन के निकट तक सुरंग से आएगी। यहां से ट्रेन एलीवेटेड हो जाएगी।
दिल्ली से मेरठ के बीच कुल 17 स्टेशन होंगे
वैशाली से ट्रेन मोहन नगर पहुंचेगी, जहां एक स्टेशन हाईस्पीड ट्रेन का और दूसरामेट्रो का होगा। मोहन नगर से नया बस अड्डा तक मेट्रो जिस रास्ते से गुजरेगी उसी रास्ते से मेट्रो से थोड़ा हटकर हाईस्पीड ट्रेन मेरठ तिराहे तक आएगी।
मेरठ तिराहे से एनएच-58 के रास्ते मुरादनगर, मोदीनगर होते हुए हाईस्पीड ट्रेन मेरठ में प्रवेश करेगी। मेरठ के कैंट एरिया में ट्रेन एक बार फिर सुरंग में घुसेगी। वहां करीब चार किलोमीटर लंबी सुरंग होगी। पल्लवपुरम अंतिम स्टेशन होगा। दिल्ली से मेरठ के बीच कुल 17 स्टेशन होंगे।
हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट का बजट 2011 में 18 हजार करोड़ रुपये था। अब इसे बढ़ाकर 24 हजार करोड़ कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि यमुना नदी के नीचे सुरंग बनाने में बड़ी राशि खर्च होगी। ऐसे में बजट 24 हजार करोड़ से ऊपर भी जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई कंपनी एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड प्रोजेक्ट में कुल लागत का 70 प्रतिशत लोन अंतरराष्ट्रीय स्तर की किसी वित्तीय एजेंसी से लेगी। बाकी तीस प्रतिशत रकम के भुगतान का जिम्मा दिल्ली और यूपी की सरकारें आएंगी।
180 की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन
सुपर स्पेशल ट्रेन
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद फिलहाल एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन 2011 में बनाई गई डीपीआर के अप्रूवल की तैयारी में जुटी है। शहरी विकास मंत्रालय से अप्रूवल मिलने के बाद प्रोजेक्ट की बीडिंग होगी। फिर फाइनेंशियल क्लोजिंग तैयार की जाएगी।
इसके बाद प्रोजेक्ट अवार्ड निर्माण कंपनी को दी जाएगी। निर्माण कंपनी से एमओयू और एमओए साइन होंगे। इस प्रक्रिया में करीब एक साल लग जाएगा। सूत्रों ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार निर्माण कार्य पूरे होने में करीब तीन-चार साल लग जाएंगे। हाईस्पीड के 90 किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण का जिम्मेदारी कारपोरेशन उठाएगी जबकि हाईस्पीड के परिचालन और रखरखाव के लिए पीपीपी मोड पर निजी क्षेत्र की सहभागिता वाली कंपनी ढूंढी जाएगी।
दिल्ली मेट्रो 100 से 120 किलोमीटर तक की स्पीड में चलती है जबकि हाईस्पीड ट्रेन 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौडे़गी। यह ट्रेन दिल्ली से मेरठ की दूरी 45 मिनट में तय करेगी। चूंकि यह लंबी दूरी की ट्रेन होगी, इसलिए इसमें मेट्रो से कहीं अधिक सीटें होंगी। ट्रेन में टॉयलेट की व्यवस्था भी होगी।