नाबालिगा से विवाह के आधार पर शारीरिक संबंध को रेप की श्रेणी में न रखने की मांग को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार ने जवाब दायर नहीं किया है। अदालत ने केंद्र को इस मुद्दे पर 23 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ रिट फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि उनका जवाब तैयार है और उस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।
ऐसे में उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया जाए। अदालत ने उनका तर्क स्वीकार कर सुनवाई 23 मई तय कर दी। याची का तर्क है कि दिसंबर 2012 में गैंगरेप की घटना के बाद आपराधिक कानून में संसोधन किया गया है।
इस कानून में पति को 15 वर्ष या उससे अधिक की पत्नी से शारीरिक संबंध पर विशेषाधिकार देते हुए ऐसे संबंध को रेप की अपेक्षा अपवाद श्रेणी में रखा गया है।