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ICU तक की आ रही नौबत: मौसम में बदलाव से बढ़े वायरल इंफेक्शन, अधिकतरों को बुखार; कई मरीजों की फूल रही सांसें

Fri, 03 Mar 2023 11:15 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) 15 दिसंबर से अभी तक आए मरीजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। 
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सर्दी जुकाम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मौसम में बदलाव के साथ वायरल इंफेक्शन से पीड़ित मरीजों की स्थिति गंभीर है। इन्हें आईसीयू की जरूरत पड़ रही है। काफी मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ऑक्सीजन बेड पर भर्ती करना पड़ रहा है। जबकि कई मरीजों को दौरे तक आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इंफ्लुएंजा का रूप बदल रहा है। यह पहले से ज्यादा घातक है और कोविड की तरह तेजी से फैल रहा है। इससे बचाव के लिए सख्ती से कोविड नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही भोजन में पौष्टिक आहार को बढ़ाना चाहिए। ताकि इम्युनिटी मजबूत रहे।

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उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) 15 दिसंबर से अभी तक आए मरीजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। इसमें 92 फीसदी मरीज बुखार से पीड़ित पाए गए हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में सांस की परेशानी के लिए इन्फ्लूएंजा-ए का एच3एन2 वायरस जिम्मेदार है। अधिकतर सैंपल की जांच में इसी की पुष्टि हुई है। यह मरीजों को लंबे समय तक बीमार बना रहा है। 

इस बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर पीयूष रंजन ने बताया कि हर बार इंफ्लुएंजा का वायरस अपना रूप बदलता है। इस बार देखा जा रहा है कि मरीजों को तेजी से गले में दर्द, बुखार, खांसी, नाक बहना, सिर दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह कोविड की तरह फैल रहा है।

इन रोगों से पीड़ितों को ज्यादा खतरा
डॉ. रंजन के अनुसार, मधुमेह रोगी, कैंसर पीड़ित, किडनी, बुजुर्ग, बच्चे, सांस के मरीज, गंभीर बीमारी के मरीज, धूम्रपान करने वाले और सांस के मरीज को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। एच3एन2 वायरस सीधे नाक, गला, फेफड़े और सांस से संबंधित समस्याओं से लोगों को पीड़ित कर देता है।
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आईसीएमआर के रिपोर्ट के आंकड़े
- करीब 92 प्रतिशत में बुखार
- 86 प्रतिशत में खांसी
- 27 प्रतिशत में सांस फूलना
- 16 प्रतिशत में गले में खराश
- 16 प्रतिशत में निमोनिया
- 06 प्रतिशत में दौरे
- 10 प्रतिशत रोगियों को ऑक्सीजन की आवश्यकता
- 07 प्रतिशत को आईसीयू की जरूरत
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