हंसराज कॉलेज के अमृत वर्ष के उद्घाटन समारोह में मौजूद उपराष्ट्रपति व अन्य
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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के गुणात्मक विकास का आधार होता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश में बड़े बदलाव का आधार बनेगी। भारत को जिस तरह की शिक्षा नीति की आवश्यकता है, वर्तमान शिक्षा नीति उस पर पूरी तरह से खरी उतरेगी। आज सभी संस्थाओं एवं जीवन में भारतीयता और भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। शिक्षा संस्थाओं को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज की स्थापना के अमृत वर्ष के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल कक्षाओं में ज्ञान प्राप्त करना नहीं बल्कि इसे व्यावहारिक शिक्षा और कौशल विकास से जोड़कर देखना चाहिए। उन्होंने छात्रों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कॉलेज के इतिहास को अत्यंत गौरवशाली बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज को स्थापना के अमृत वर्ष के अवसर का उपयोग कुछ नए और बड़े संकल्प के लिए करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने महात्मा हंसराज पर केंद्रित कॉलेज की प्रिंसिपल द्वारा लिखित पुस्तक आर्यसमाज और महात्मा हंसराज का लोकार्पण भी किया।
समारोह से पहले उन्होंने कॉलेज परिसर में नव स्थापित महात्मा हंसराज की प्रतिमा का अनावरण भी किया। हंसराज कॉलेज की स्थापना के अमृत महोत्सव के इस उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू समेत दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, हंसराज कॉलेज प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष डॉ. एके शर्मा एवं कोषाध्यक्ष डॉ. शिवरमन गौड़ तथा कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा मौजूद थे। डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने डीयू के शताब्दी वर्ष और हंसराज कॉलेज के अमृत वर्ष को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में हंसराज कॉलेज और डीयू को नई ऊंचाई तक ले जाने का संकल्प लेना होगा।