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Umar Khalid: उमर खालिद को बहन की शादी के लिए मिली अंतरिम जमानत, दिल्ली दंगा मामले में है आरोपी

Mon, 12 Dec 2022 06:02 PM IST
अनुराग सक्सेना एएनआई, दिल्ली

सार

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (यूएएच) के संस्थापक अब्दुल खालिद सैफी की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सैफी दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी है।
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उमर खालिद - फोटो : ANI
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विस्तार
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उत्तर पूर्वी दंगा मामले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली की एक अदालत ने एक सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। खालिद ने अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत की अर्जी दायर की थी।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने खालिद को 23 से 30 दिसंबर तक के लिए जमानत दी। खालिद पर फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में कथित मुख्य साजिशकर्ता होने के आरोप लगने के बाद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दंगों में 53 लोग मारे गए थे जबकि 700 से अधिक घायल हुए थे। सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। दिल्ली पुलिस ने खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था।
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खालिद सैफी की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (यूएएच) के संस्थापक अब्दुल खालिद सैफी की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सैफी दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी है। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने सैफी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन और दिल्ली पुलिस की और से पेश विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद के तर्क सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

विशेष अदालत ने आठ अप्रैल को सैफी को जमानत देने से इंकार कर दिया था। अदालत ने माना था कि सैफी पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। उन्हें फरवरी 2020 में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया था, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। वह तभी से जेल में है।

सैफी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आरोप लगाया कि वह उमर खालिद जैसे अन्य सह-साजिशकर्ताओं के साथ दिल्ली दंगों की योजना बनाने में शामिल थे।

सैफी ने राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को एक मोर्चे के रूप में इस्तेमाल किया। बचाव पक्ष ने कहा कि उनके मुवक्क्लि की दंगों में कोई भूमिका नहीं है और न ही उसने कोई भड़काऊ भाषण दिया। पुलिस ने उसे फर्जी मामले में फंसाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन सैफी ने तर्क दिया कि दिल्ली पुलिस का पूरा मामला विशेष प्रकोष्ठ के कार्यालय में बैठे दो-तीन लोगों की राय पर आधारित है, जो व्हाट्सएप संदेशों को अर्थ दे रहे हैं।

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