दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर हड़ताल का सबसे अधिक असर देखने को मिला। दरअसल यूनियन के लोग इन्हीं जगहों पर तैनात थे। ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को टैक्सी और ऑटो चालक ले जाने से इनकार करते रहे। जो चालक सवारी ले जाने को तैयार होता तो उसे जबरन रोका जा रहा था। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस के हस्तक्षेप करने पर भी हड़ताली यूनियन के सदस्य रास्ते में खड़े हो रहे थे। इस वजह से नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार और निजामुद्दीन स्टेशन पर लोग परेशान दिखे। बस स्टैंड पर भी लोग परेशान हुए। हालांकि आनंद विहार बस अड्डे पर ट्रैफिक पुलिस काफी सक्रिय रही।
ओला-उबर कैब का रेट दोगुना
हड़ताल का असर ओला-उबर कैब के रेट पर भी दिखा। ऐप बेस्ड इन टैक्सियों की डिमांड बढ़ने पर अचानक इनका रेट दोगुना तक बढ़ गया। ऑटो-टैक्सी नहीं चलने के कारण यात्रियों को मजबूरी में दोगुना किराया चुकाना पड़ा। अन्य दिनों के मुकाबले इस कैब के लिए एयरपोर्ट ही नहीं, रास्ते में भी लोगों को ज्यादा इंतजार करना पड़ा।
व्यापार हुआ प्रभावित
हड़ताल ने दिल्ली के व्यापार को भी प्रभावित किया। दिल्ली पहुंचने वाले व्यापारियों ने खरीदारी तो की, लेकिन माल को ट्रांसपोर्टरों के हवाले करने को मजबूर दिखे। आजादपुर मंडी में ट्रक से सब्जियां तो पहुंचीं, लेकिन छोटे कमर्शियल वाहन नहीं चलने की वजह से ज्यादातर माल गली-मुहल्लों और शहर तक नहीं पहुंचा। पुरानी दिल्ली इलाके में छोटे कमर्शियल वाहन नहीं चलने से व्यापारियों की समस्या बढ़ गई।
चार्टर्ड बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा सड़कों पर नहीं चले। हालांकि दिल्ली मेट्रो और डीटीसी की बसों पर इस बंद का असर नहीं दिखा। इससे लोगों को काफी राहत मिली। चार्टर्ड बसें नहीं मिलने के कारण कार्यालय से लौटने वालों ने सार्वजनिक वाहनों का सहारा मिला। हालांकि शाम के वक्त दफ्तरों से निकलने वालों को परेशान होना पड़ा। बसों का इंतजार करने के बाद कई लोगों ने मेट्रो से घर तक पहुंचना ही उचित समझा।
बैट्री रिक्शा बने सहारा
लोगों को बैट्री रिक्शा का सहारा मिला। टैक्सी यूनियन से इत्तफाक नहीं रखने वाले बैट्री रिक्शा चालकों ने राह को काफी आसान किया। मेट्रो स्टेशनों तक लोग इसी वाहन का सहारा लेकर पहुंचे।
यूएफटीए ने चक्का जाम को सफल बताया
यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (यूएफटीए) के महासचिव श्यामलाल गोला ने कहा कि इस हड़ताल में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 50 से ज्यादा यूनियनों ने हिस्सा लिया। चक्का जाम पूरे तरीके से सफल रहा। चक्का जाम मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन के खिलाफ था। उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम के कुछ अन्य प्रावधान को वापस लेने की मांग की है।
समर्थन में नहीं आई यूनियन
हड़ताल में दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने हिस्सा नहीं लिया। एसोसिएशन से जुड़े संजय सम्राट ने कहा कि जिन मुद्दों पर चक्का जाम किया गया, इसका ड्राफ्ट दो महीने पहले ही तैयार कर लिया गया था। इसके खिलाफ जब टूरिस्ट एसोसिएशन ने आवाज उठाई, तो किसी ने समर्थन नहीं किया। प्रमुख संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की, लेकिन कोई इस अभियान से नहीं जुड़ा।
ये हैं ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांगें
-सरकार बढ़ाई गई जुर्माने की राशि कम करे।
-थर्ड पार्टी बीमा की रकम की कैपिंग को हटाया जाए।
-पार्किंग की सुविधा मुहैया कराई जाए।