सूचना मिलते ही दिल्ली में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस के अलावा बम व डॉग स्क्वायड को मौके पर पहुंच गए। गनीमत यह रही कि रविवार को छुट्टी होने की वजह से अस्पताल में ज्यादा भीड़ नहीं थे। पुलिस, दमकल विभाग व बाकी जाचं एजेंसियों ने अस्पताल, एयरपोर्ट की सघन तलाशी ली।
छानबीन के बाद पुलिस को वहां से कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। माना जा रहा है कि स्कूलों में बम रखे जाने की सूचना देने वाले ग्रुप ने ही अस्पताल व दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर बम की झूठी सूचना दी है। शुरुआती जांच के बाद पुलिस को पता चला है कि ईमेल यूरोप से भेजा गया है। किसी (कोर्ट ग्रुप) court Group ने ईमेल भेजने और बम रखने की जिम्मेदारी ली है।
फिलहाल खबर लिखे जाने तक नौ अस्पतालों और एयरपोर्ट की तलाशी ली जा चुकी थी। बाकी अस्पतालों से संपर्क किया जा रहा था। लोकल पुलिस के अलावा स्पेशल सेल व बाकी जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों ईमेल भेजने वाले तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 3.04 मिनट पर दिल्ली के 20 अस्पतालों के अलावा आईजीआई और उत्तर रेलवे के सीपीआरओ दफ्तर को बम से उड़ाने का एक ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल courtgroup03@beeble.com से भेजा गया था। शुरुआत में संजय गांधी अस्पताल और बुराड़ी सरकारी अस्पताल प्रशासन ने ईमेल देखकर पुलिस को खबर दी।
इसके बाद दिल्ली के दूसरे अस्पतालों से भी इसी तरह के ईमेल प्राप्त होने की खबर आने लगी। अरुणा आसफ अली अस्पताल, जीटीबी अस्पताल, जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, डीडीयू अस्पताल, दादा देव मातृ एवम शिशु चिकित्सालय, ग्रामीण स्वस्थ्य प्रशिक्षिण अस्पताल नजफगढ़ व एक अन्य अस्पताल ने ईमेल मिलने की सूचना पुलिस को दी।
एक ही ईमेल में सीसी कर 20 अस्पतालों के अलावा उत्तर-रेलवे को भी ईमेल भेजा गया था। अंग्रेजी में लिखी धमकी में आरोपी ने लिखा था कि उसने इमारत में बम रख दिया है। कुछ ही घंटों में बम फट जाएगा। यह कोई धमकी नहीं है, कुछ ही घंटों में धमाके के साथ बेगुनाहों का खून पड़ा होगा। अब सब कुछ आपके हाथ में है।
खबर मिलते ही तुरंत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। खुद कई जिला पुलिस उपायुक्त अलग-अलग अस्पताल में बम व डॉग स्क्वायड के साथ पहुंचे। हालांकि अस्पताल में मौजूद मरीजों व उनके तिमारदारों को बम रखे होने की भनक नहीं लगने दी गई। इसके अलावा रविवार को छुट्टी होने की वजह से अस्पतालों में भीड़ भी कम रही।
काफी देर चली तलाशी के बाद ज्यादातर जगहों पर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से स्कूलों को कॉल कर धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे, ठीक उसी तरह से अस्पतालों को भी ईमेल भेजे गए। उनको इस बात का अंदाजा था कि वहां कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन एहतियात और प्रोटोकॉल की वजह से पूरी प्रक्रिया का पालन करना होता है।