सेक्टर-31 निवासी रिटायर्ड मेजर जनरल एनके धीर ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की है कि 10 अगस्त को उनके पास डीएचएल कोरियर सर्विस का कर्मचारी बताते हुए एक शख्स ने फोन किया। उसने बताया कि ताइवान भेजे जा रहे संदिग्ध पार्सल में आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसमें पांच पासपोर्ट, चार बैंकों के क्रेडिट कार्ड, ड्रग्स समेत अन्य आपत्तिजनक सामग्री है। इस पर रिटायर्ड मेजर जनरल ने कहा कि उन्होंने इस तरह का कोई पार्सल नहीं भेजा है।
इस पर कथित कोरियर सर्विस वाले ने कहा कि अगर उनके आधार कार्ड के साथ छेड़छाड़ हुई है तो मुंबई क्राइम ब्रांच में इसकी शिकायत करें। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल को अजय कुमार बंसल नामक कथित मुंबई पुलिस के अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद अजय बंसल ने पीड़ित से पूछताछ की और उनके पास सीबीआई का एक लेटर भेजा गया। इसमें लिखा था कि अगर उसे जेल जाने से बचना है तो पूछताछ संबंधी कोई भी जानकारी परिवार के लोगों से साझा नहीं करनी होगी। इस दौरान दावा किया कि मेजर जनरल पर कभी भी हमला हो सकता है। डराने के लिए एक चिकित्सक दंपती का उदाहरण भी दिया गया, जिसकी चेन्नई में हत्या हुई थी।
इसके बाद एक कथित डीसीपी ने पीड़ित से वित्तीय जानकारी मांगी। म्यूच्यूअल फंड्स और एफडी को तोड़कर पूरी रकम ठगों ने विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए कहा। जेल जाने से बचने के लिए रिटायर्ड मेजर जनरल ने बैंक जाकर जालसाजों द्वारा बताए गए खातों में दो करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर कर दी। इस दौरान आरोपियों ने कहा कि जांच के बाद पूरी रकम फिर से उसके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। जब पीड़ित पर लोन लेकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाने लगा तब उसे ठगी की आशंका हुई और उसने पुलिस से संपर्क किया। पैसे वापस मांगने पर ठगों ने पीड़ित से संपर्क तोड़ दिया। इस दौरान करीब पांच दिन तक जालसाजों ने पीडि़त को डिजिटल अरेस्ट रखा।
कई संदिग्ध खातों का पता चला
एसीपी साइबर क्राइम विवेक रंजन राय का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है। साइबर सेल की टीम लगी हुई है। जालसाजों ने जिन खातों में रकम ट्रांसफर कराई है। उनकी जांच की जा रही है। कुछ संदिग्ध खातों के बारे में पता चला है। उन खाताधारकों के बारे में पता लगाया जा रहा है। एसीपी ने दावा किया कि जल्द ही इस मामले में शामिल साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया जाएगा।
डिजिटल अरेस्ट के आरोपियोंं को पकड़ नहीं पा रही पुलिस
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में साइबर जालसाजी की घटनाएं लगातार हो रही है। खासकर डिजिटल अरेस्ट कर जालसाज बड़ी रकम की ठगी कर रहे हैं। इन मामलों में साइबर क्राइम पुलिस बहुत कम मामलों में गिरफ्तारी कर सकी है। गिरफ्तारी हुई भी है तो केवल खाताधारकों की ही। इससे पहले 9 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में राजस्थान के छह जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके अलावा महिला डॉक्टर से 40 लाख की ठगी हो या कारोबारी से 85 लाख की जालसाजी। इन मामलों में पुलिस कोई गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।