दिल्ली सरकार के वैट विभाग की बिल बनाओ, ईनाम पाओ योजना स्कूली बच्चों से जुड़ेगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को बिल बनाओ, ईनाम पाओ के पांचवें कार्यक्रम में वैट आयुक्त को कहा है कि राजधानी में 26 लाख बच्चें स्कूलों में पढ़ते हैं।
योजना को बच्चों से जोड़ें ताकि वो मम्मी-पापा से कहें, पैसे दिए हैं तो बिल भी लें। साथ में विजेताओं से यह भी अपील करें कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह योजना पहुंचाएं। जितने ज्यादा बिल डीवैटबिल ऐप पर आएंगे, उतने ज्यादा लोगों को पुरस्कार मिलेगा।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि सामान्य गतिविधि में हम सुबह से शाम तक जो कुछ खरीदते या सेवा लेते हैं, उसका बिल बनवाएं। बिना बिल बनवाए भी 70-80 फीसदी मामले में कर अदा करते हैं। सरकार ने बिल बनाओ, ईनाम पाओ योजना से एक साथ एक लाख इंस्पेंक्टर कर चोरों का पता लगाने के लिए ग्राहक के तौर पर लगा दिए हैं।
64 विजेताओं को 8.5 लाख रुपये का पुरस्कार
दिल्ली सचिवालय में आयोजित पुरस्कार कार्यक्रम में 7 विजेताओं को 50-50 हजार रुपये समेत 64 विजेताओं को 8.5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। पश्चिम विहार निवासी डिंपल को इस योजना के तहत दूसरी बार पुरस्कार मिला।
डिंपल को पहली बार परचून के सामान का बिल भेजने पर 2 हजार रुपये का पुरस्कार मिला था तो दूसरी बार सोने के पेंडल का बिल भेजने पर 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिला है।
इसके साथ ही योगेश ने 6 हजार रुपये के कपड़े खरीदे थे जिसका बिल भेजकर लॉटरी में 24 हजार रुपये का पुरस्कार मिला।
व्यापारियों की हर समस्या दूर करेगी हेल्पलाइन
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को अपनी किस्म का पहला हेल्पलाइन नंबर लांच किया। छह अंक के हेल्पलाइन नंबर 155055 की 30 लाइन एकसाथ काम करेंगी। जिसे प्रोफेशनल कॉल सेंटर से संचालित किया जाएगा।
सिसोदिया ने हेल्पलाइन शुरू करते समय नंबर पर फोन करके कुछ जानकारी भी मांगी। साथ ही उन्होंने विभाग अधिकारियों से कहा कि पांच कॉल रोजाना चेक करें कि किस तरह कॉल सेंटर सुविधा दे रहा है।
वैट आयुक्त एसएस यादव ने कार्यक्रम में बताया कि अभी तक विभाग के हेल्प डेस्क पर लाइन कम थीं। स्टाफ कम था तो रिस्पांस ठीक नहीं मिल पाता था। अब हेल्पलाइन पर मोबाइल या लैंडलाइन से कोई भी व्यक्ति 155055 डॉयल करके व्यापार से जुड़ी कोई भी सूचना मांग सकता है।
कॉल सेंटर सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक काम करेगा। अगर जरूरत पड़ी तो इसे 24 घंटे किया जा सकता है। अगर कोई शिकायत पहले स्तर पर दूर नहीं होती है तो वरिष्ठ अधिकारी के पास शिकायत भेजी जाएगी।