कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में हुई डॉक्टर की हत्या के विरोध में तीसरे दिन भी दिल्ली के सभी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। हड़ताल की पहले से सूचना होने के कारण बुधवार को काफी कम मरीज इलाज के लिए ओपीडी में पहुंचे। कुछ अस्पतालों में ओपीडी की संख्या घटकर 30 फीसदी तक रह गई। जबकि ज्यादातर अस्पतालों में 40 से 50 फीसदी मरीज इलाज करवाने आए। बुधवार को अस्पतालों में सर्जरी के साथ जांच की संख्या भी काफी कम रही।
हड़ताल के कारण दूसरे राज्याें से आए मरीजों का इंतजार बढ़ गया है। इनमें से अधिकतर मरीज सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। बिहार के बेतिया से एम्स में अपने पिता का इलाज करवाने आए बड़े बाबू ने बताया कि सोमवार को डॉक्टर की ओपीडी होती है, लेकिन डॉक्टर न होने के कारण दिखा नहीं पाए। अब अपॉइंटमेंट लेना होगा, लेकिन जैसे हालत बन रहे है, लगता नहीं है कि शुक्रवार तक भी दिखा पाएंगे। उनका कहना है कि एम्स मेट्रो स्टेशन के पास ही रात गुजारते हैं। दिन में परिसर में चले जाते हैं। उनका कहना है कि यदि सोमवार को डॉक्टर को दिखा देते तो वापस घर जा सकते थे। यहां तीन माह में एक बार आना होता है।
डॉक्टरों ने निकाला विरोध मार्च
बुधवार को एम्स, सफदरजंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग, मदन मोहन मालविय, श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, इंदिरा गांधी अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल में विरोध मार्च भी निकाला। ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन फेडरेशन ने राज्यों और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) के साथ बैठक के बाद कहा कि वह हत्या की निंदा करने और अपनी हड़ताल जारी रखने में देश भर के अपने साथियों के साथ खड़ा रहेगा। एम्स और सफदरजंग सहित कई अस्पतालों ने अपनी हड़ताल जारी रखी।
बैठक में बदला गया आरडीए अध्यक्ष
डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने की बात सामने आने के बाद बुधवार को अचानक मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज व इससे संबंधित अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की बैठक हुई। इस बैठक में अध्यक्ष अविरल माथुर को हटाकर डॉ. अपर्णा सेतिया को जिम्मेदारी सौंपी गई। बता दें कि डॉ. अविरल माथुर फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के भी अध्यक्ष हैं। मंगलवार देर रात फोर्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन पर हड़ताल वापस लेने का ऐलान किया है। हालांकि फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) और अलग-अलग अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरएडी) ने हड़ताल जारी रखी है।
डॉक्टरों के समर्थन में आए फैकल्टी
डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के समर्थन फैकल्टी भी आ गए हैं। बुधवार को एम्स की फैकल्टी ने रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रदर्शन का समर्थन किया। फैकल्टी एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने डॉक्टरों का समर्थन करते हुए कहा कि डॉक्टर पिछले तीन दिनाें से पीड़ित महिला डॉक्टर को न्याय दिलाने की मांग करते हुए हड़ताल कर रहे हैं। इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियां की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून जल्द बनना चाहिए। एम्स के अलावा सफदरजंग अस्पताल की फैकल्टी ने भी डॉक्टरों का समर्थन किया है। बता दें कि डॉक्टरों की हड़ताल के बाद मरीजों का इलाज फैकल्टी ही कर रही है। वहीं श्री दादा देव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय की फैकल्टी ने मंगलवार देर रात कैंडल मार्च निकाला था। इसके अलावा बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्वी यूनिट ने देर शाम कैंडल मार्च निकाला।
सुरक्षा पहले, काम बाद में, जारी रहेगी हड़ताल
एम्स, सफदरजंग, डॉ. राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग, जीटीबी, डीडीयू, इंदिरा गांधी सहित दिल्ली के दूसरे अस्पतालों में सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि जबतक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। विरोध प्रदर्शन इसी तरह से जारी रहेगा। डॉक्टरों का कहना है कि हड़ताल के दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेगी।
आज का दिन चुनौती भरा
15 अगस्त के दिन दिल्ली के अस्पतालों में बड़ी संख्या मे लोग मांझे से कटकर, छत से गिरकर व दूसरे कारणों से घायल होकर पहुंचते हैं। ऐसे लोगों के लिए अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा जाता है, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण बृहस्पतिवार को सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि सभी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं सामान्य चल रही है। यदि कोई दिक्कत होती है तो देखा जाएगा। बता दें कि विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने वार्ड में सेवाएं देने से भी मना कर दिया है। ऐसे में यदि किसी मरीज को भर्ती किया जाता है तो देखभाल के लिए पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहेंगे।
पैर की टूटी हड्डी, नहीं मिला इलाज
पलवल से आरएमएल में इलाज कराने पहुंचे अजय ने बताया कि उनका एक्सीडेंट हो गया था। पैर की हड्डी टूट गई है। उन्होंने बताया कि हड़ताल का असर है कि उन्हें शुक्रवार के लिए इलाज का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। वहीं, सरिता विहार से अपने बच्चे का इलाज कराने आई हेमलता ने बताया कि उनके बेटे को दो दिन से तेज बुखार है। पर्ची तो बन गई है, लेकिन डॉक्टर नहीं देख रहे हैं।