प्रदेश सरकार ने चिकनगुनिया की जांच की फीस 600 रुपये निर्धारित कर दी है। निजी पैथोलॉजी लैब और अस्पतालों में इस बीमारी की जांच के नाम पर 1500 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पताल और लैब संचालकों को पत्र जारी कर सरकारी आदेश की जानकारी दे दी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित फीस से ज्यादा वसूलने वाले अस्पताल या लैब के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि इन दिनों शहर में चिकनगुनिया, मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार का प्रकोप छाया है। हालात यह हैं कि सरकारी और निजी सभी अस्पताल बुखार से पीड़ित मरीजों से भरे पड़े हैं।
समान लक्षण की वजह से पुष्टि के लिए ज्यादातर मरीजों की चिकनुनिया पॉजिटिव होने की जांच की जा रही है। इसका फायदा निजी अस्पताल और लैब वाले उठा रहे हैं।
चिकनगुनिया टेस्ट के नाम पर मरीजों से 1500 रुपये तक प्रति टेस्ट वसूल किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने प्राइवेट हॉस्पिटलों और लैब संचालकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए चिकनगुनिया के टेस्ट की 600 रुपए निर्धारित कर दी है।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामभगत ने बताया कि चिकनगुनिया जांच की फीस छह सौ रुपये निर्धारित किए जाने का आदेश चंडीगढ़ में संपन्न हुई ट्रेनिंग के दौरान सभी जिलों के मेडिकल अधिकारियों को दिए गए थे।
इस संबंध में शहर के सभी छोटे व बड़े हॉस्पिटलों, नर्सिंग होम और लैब संचालकों को भेज दिए गए हैं। सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉ. सौरव गहलोत, क्यूआरजी हॉस्पिटल के डॉ. कुलविंदर और एशियन हॉस्पिटल के एजीएम डॉ. उमाकांत ने बताया कि इस संबंध में सोमवार को आदेश प्राप्त हो चुके हैं और लैब टेक्नीशियनों तक भी पहुंचा दिए गए हैं।