हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर वंचितों का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए। ये लोग बरसों से उपेक्षित रहे हैं और उनको समाज में बराबरी करने देने के लिए संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ उन्हें अन्य छूट भी दी जाना चाहिए। दरअसल अनुसूचित जाति से संबंधित याची लेखराज मीणा किसान आंदोलन के चलते नौकरी के लिए जरूरी हाइट छूट संबंधी प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं करवा पाया था, जिसके कारण उसे नौकरी से वंचित होना पड़ा।
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला एवं न्यायमूर्ति आशा मेनन की खंडपीठ ने सीआईएसएफ को याची लेखराज मीणा की हाइट में छूट प्रमाणपत्र को स्वीकार करें और उसकी योग्यता के अनुसार उसकी बहाली पर विचार करें। खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आरक्षण का प्रावधान मुख्य रूप से वंचितों को सहायता प्रदान करने और उन्हें समाज के अन्य जातियों के साथ बराबरी में लाने को लेकर किया गया है क्योंकि वे कई पीढ़ियों से वंचित रहे हैं।
दरअसल याची लेखराज मीणा अनुसूचित जनजाति से है। उसने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में नौकरी के लिए आवेदन किया। उनकी भर्ती इस आधार पर रद्द कर दी गई कि उसने हाइट की छूट संबंधी प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं करवाया था। याची ने तर्क रखा कि हाईट में छूट संबंधी प्रमाणपत्र मजिस्ट्रेट, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट व जिला तहसील दार द्वारा बनाया जाता है। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उसे अपने गृहनगर राजस्थान के करौली में जाना था लेकिन किसान आंदोलन के चलते वह प्रमाणपत्र नहीं बनवा पाया।हालांकि उसने अपना जाति प्रमाणपत्र जमा करवा दिया था।
सीआईएसएफ की अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के तर्को को खारिज करने का आग्रह करते हुए तर्क रखा कि जाति प्रमाण पत्र के अलावा उम्मीदवार को आवेदन पत्र के प्रथम चरण में या मेडिकल परीक्षा के समय ऊंचाई छूट के लिए प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी है। इसके अलावा याची को प्रमाणपत्र जमा करवाने के लिए पांच दिन का अतिरिक्त समय दिया था लेकिन वह इस समय में भी वह ऐसा करने में असमर्थ रहा ।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि उनका मानना है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों को छूट या आरक्षण देने के अलावा आरक्षण को लागू करने में भी छूट दी जानी चाहिए । खंडपीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि यह तथ्य कि अनुसूचित क्षेत्रों के सदस्यों को न केवल विधायी रूप से बल्कि संवैधानिक रूप से भी कुछ आरक्षण/ छूट प्रदान किया गया है और यह आवश्यकता को दर्शाता है।
अदालत ने कहा कि उक्त जरूरत को न केवल आरक्षण/छूट प्रदान करके बल्कि उक्त आरक्षण और एसटी को प्रदत्त लाभों को लागू करने में छूट प्रदान करके भी पूरा किया जाना चाहिए। खंडपीठने कहा कि इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि किसानों के चल रहे आंदोलन के कारण याची प्रमाणापत्र जमा नहीं करवा पाया था।