अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में कथित फंडिंग के संबंध में ईडी ने मामला दर्ज किया था।
अदालत ने पूर्वोत्तर दंगो से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका शनिवार को खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
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अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशेष लोक अभियोजक एन के माटा के तर्को को स्वीकार कर लिया कि आरोपी के खिलाफ रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री थी और उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि इस आशय के पर्याप्त सबूत और गवाह हैं कि आरोपी दंगों के वित्तपोषण में शामिल था।
अधिवक्ता माटा ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अन्य आरोपियों को दंगा करने और हथियार खरीदने के लिए पैसे बांटे। बचाव पक्ष के वकील ने जमानत अर्जी में दावा किया था कि उनके मुवक्किल के खिलाफ धन शोधन का कोई मामला नहीं बनता है। उन्होंने तर्क दिया कि ईडी के मामले का आधार फर्जी है कि 1.5 करोड़ रुपये का कथित लेनदेन हुआ।
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ईडी ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले के आधार पर हुसैन और अन्य के खिलाफ धन शोधन रोकथाम (पीएमएलए) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की थी। हुसैन फरवरी 2020 में पूर्वोत्तर दंगों के संबंध में मुख्य आरोपियों में से एक थे।