जिन शिल्पकारों के लिए सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला लगा हुआ है इसमें प्रवेश के लिए उन्हीं को धक्के खाने पड़ रहे हैं। मानो उनकी बेकद्री की इंतहा हो गई है।
हमने शनिवार को मेले के दो तस्वीरें लीं। अंदर जगह-जगह स्टॉल खाली हैं और बाहर शिल्पी धक्के खा रहे हैं। जिससे जाहिर होता है मेला प्रशासन के कुछ अधिकारी किसी विशेष मकसद से शिल्पियों को बाहर रखे हुए हैं।
शिल्पियों का कहना है कि अलॉटमेंट करने वाले अधिकारी पैसा मांग रहे हैं। अपने जानकारों को स्टॉल अलॉट कर रहे हैं और अन्य लोगों को धक्के खाने पर मजबूर कर रहे हैं।
गालियां दी जा रही हैं
कुछ शिल्पियों ने बताया कि वह लोग यहां तीन दिन से रजिस्ट्रेशन एवं अलॉटमेंट का इंतजार कर रहे हैं। कोई बनारस से आया है तो कोई जम्मू और कोई गुजरात से...सबकी यही व्यथा है कि यहां कलाकारों की कद्र नहीं हो रही बल्कि उन्हें दुत्कारा जा रहा है। उन्हें गालियां दी जा रही हैं।
हजारों रुपये में दुकानें बेची जा रही हैं
हरियाणा से आए राधेश्याम एवं राजस्थान से आए सैफ ने बताया कि यहां पर शिल्पियों को पुलिस ने पीटा है। उनके साथ बुरा बर्ताव किया है। इसलिए लोगों में अफरा तफरी मच गई और बैरीकेट तक टूट गए। बनारस से यहां बनारसी साड़ी बेचने आए अब्दुल अजीज, गुजरात से लहंगा, चुंदरी बेचने आए चंदू भाई और पंजाब से फुलकारी शूट बेचने आईं मंजीत कौर का कहना है कि उन्हें कुछ लोग परेशान कर रहे हैं। हजारों रुपये में दुकानें बेची जा रही हैं।
जम्मू से पशमीना शॉल बेचने आए शबीर अहमद एवं हुसैन का कहना है कि अब वह इस मेले में दोबारा नहीं आएंगे। क्योंकि यहां कलाकारों की कद्र नहीं है। जिसकी सिफारिश है, जिसने पैसे दिए हैं सिर्फ उसे स्टाल मिलता है। रहने और खाने का इंतजाम करना तो दूर की बात है।
इन्हीं गड़बडिय़ों के कारण मेला शुरू होने के बाद भी किसी स्टॉल पर उसके बारे में डिटेल तक नहीं लगी है।
शिल्पियों के रजिस्ट्रेशन एवं अलॉटमेंट के इंचार्ज एवं टूरिज्म डिपार्टमेंट के इंचार्ज रमेश भाटिया का कहना है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। उनका कहना है कि हैंडलूम के लोगों के लिए अलॉटमेंट का काम कोई और देख रहा है।
लेकिन के पास टूरिज्म डिपार्टमेंट का जो ड्यूटी ऑर्डर है उसमें हैंडलूम, हैंडीक्रॉफ्ट एवं विभिन्न सरकारी एजेंसियों की ओर से स्पांसर्ड स्टॉलों की अलॉटमेंट, रजिस्ट्रेशन एवं आई कार्ड जारी करने का काम भाटिया के जिम्मे बताया गया है।