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'आम' केजरीवाल को VIP लिफ्ट की जानकारी नहीं

Sat, 01 Feb 2014 05:55 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आने से पहले एनडीएमसी ने पालिका केंद्र की उस लिफ्ट से वीआईपी लिखी हुई प्लेट हटा दी, जिसका एनडीएमसी के अध्यक्ष समेत वरिष्ठ अधिकारी और सदस्य इस्तेमाल करते हैं।
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सूत्रों के अनुसार, एनडीएमसी ने केजरीवाल के वीआईपी कल्चर के विरोध के चलते ऐसा किया। अधिकारियों को आशंका थी कि लिफ्ट के बाहर वीआईपी लिखा देख मुख्यमंत्री कहीं उसका इस्तेमाल करने से मना न कर दें।

इस बारे में केजरीवाल को कुछ पता नहीं था। अधिकारी उन्हें उसी लिफ्ट से ऊपर ले गए थे और उसी लिफ्ट से वापस लाया गया।

केजरीवाल बने एनडीएमसी के सदस्य
नई दिल्ली इलाके से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली छावनी इलाके से विधायक होने के नाते आम आदमी पार्टी के सुरेंद्र सिंह ने शुक्रवार को एनडीएमसी के सदस्य के तौर पर शपथ ली।
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केजरीवाल को एनडीएमसी के अध्यक्ष जलज श्रीवास्तव ने शपथ दिलाई, जबकि सुरेंद्र सिंह को खुद केजरीवाल ने शपथ दिलाई, क्योंकि एनडीएमसी का सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार मिल गया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय से एनडीएमसी के सदस्य बनाए जाने की अधिसूचना जारी होने के बाद मुख्यमंत्री करीब दो बजे पालिका केंद्र में पहुंचे, जबकि उनके साथी विधायक सुरेंद्र कुमार कुछ देर पहले ही पहुंच गए थे। बैठक में शपथ लेने के बाद केजरीवाल ने सभी अधिकारियों को अपनी पार्टी के एजेंडे से अवगत कराया।

उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने में उनका साथ दें। इस दौरान जलज श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को एनडीएमसी की कार्यप्रणाली और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।

कर्मचारी एक झलक पाने को बेताब
पालिका केंद्र में केजरीवाल के आने की खबर मिलने पर सभी कर्मचारियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। उनकी एक झलक पाने के लिए डेढ़ बजे ही कर्मचारी भूतल पर पहुंचने शुरू हो गए थे। दो बजे तक स्वागत कक्ष के सामने लोगों के खड़े होने के लिए जगह नहीं बची।

पहली बार पालिका केंद्र आए केजरीवाल ने भी कर्मचारियों को निराश नहीं किया। वे सीधे लिफ्ट के पास जाने की बजाय स्वागत कक्ष के सामने गाड़ी से उतर गए। उन्होने सबसे पहले कर्मचारियों से हालचाल पूछा और फिर हाथ मिलाया।

कर्मचारियों में उनसे हाथ मिलाने की होड़ लग गई। सबने तालियों से उनका स्वागत किया और मोबाइल से फोटो खींचे। करीब पांच मिनट तक कर्मचारियों के बातें सुनने के बाद वे बैठक में चले गए।
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