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Delhi NCR News: बदरपुर से सादिक नगर तक सबवे बेहाल, गंदगी और असुरक्षा से बढ़ी चिंता

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-सुरक्षा के अभाव में सुनसान पड़े सबवे, रात होते ही बढ़ जाती हैं परेशानियां
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सचिन कुमार
नई दिल्ली। बदरपुर, जैतपुर, लाजपत नगर, एंड्रयूज गंज और मदनगीर और सादिक नगर समेत कई इलाकों के सबवे गंदगी, खराब रोशनी और सुरक्षा की कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई लोग इन रास्तों का इस्तेमाल करने के बजाय व्यस्त सड़कों को सीधे पार करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। दिल्ली को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन कई सबवे उन दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। इन जगहों पर जाते ही अंधेरा, सीलन, बदबू और गंदगी लोगों का स्वागत करती है। कई जगहों पर दीवारों पर पान-गुटखे के निशान हैं तो कहीं टूटी सीढ़ियां और खराब लाइट परेशानी बढ़ा रही हैं।

सबवे में उतरते ही लगता है डर
बदरपुर बॉर्डर स्थित सबवे में दिन के समय भी पर्याप्त रोशनी नहीं है। सीढ़ियों से नीचे उतरते ही अंधेरा, सीलन और दुर्गंध रहती है। दीवारों पर पान-गुटखे के निशान और कोनों में जमा कूड़ा इस बात की गवाही देते हैं कि सफाई व्यवस्था नियमित नहीं है। स्थानीय निवासी दीपक ने बताया कि पहले हम सबवे का इस्तेमाल करते थे। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सुरक्षित रास्ता लगता था। लेकिन अब हालत इतनी खराब हो गई है कि परिवार के लोगों को वहां से जाने नहीं देते। कभी कभी अंदर अजीब माहौल रहता है। ऐसे में सड़क पार करना ज्यादा ठीक लगता है।
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जैतपुर में भी हालात कुछ अलग नहीं है। यहां के सबवे में कई जगहों पर पानी जमा रहता है। बारिश के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है। सीढ़ियों पर फिसलन और टूटी टाइल्स हादसे का खतरा बढ़ा रही हैं। जैतपुर निवासी रिंकी ने बताया कि हमारे यहां सबवे के अंदर जाते ही डर लगने लगता है। अगर कोई महिला अकेली हो तो उसकी जान निकल जाए। उधर, रोशनी कम है और कई बार वहां अजनबी लोग बैठे रहते हैं।

रात होते ही बढ़ जाती हैं परेशानियां
सादिक नगर और मदनगीर के सबवे में भी शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, रात में यह स्थान सुनसान हो जाते हैं, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते हैं। सादिक नगर निवासी सत्यम ने बताया कि रात में कई लोग सबवे से गुजरने से बचते हैं। वहां कुछ लोग बैठे रहते हैं। कई बार नशाखोरी और शराबखोरी की शिकायत भी हुई है। वहीं, राहगीर क्रिश ने बताया कि कई बार सबवे के अंदर खाली शराब की बोतलें और प्लास्टिक का कचरा देखने को मिलता है।
सबवे की बदहाली का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और छात्राओं पर पड़ रहा है। कई महिलाओं ने बताया कि अगर रास्ता सुनसान हो तो वह सबवे का उपयोग करने से बचती हैं। कॉलेज छात्रा नेहा ने बताया कि अगर सबवे में अच्छी रोशनी और सुरक्षा हो तो कोई समस्या नहीं है। लेकिन कई जगह अंदर जाते ही डर लगता है। इस गृहिणी नीलम देवी ने बताया कि बच्चों को अकेले सबवे से जाने नहीं देते।
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करोड़ों की लागत, लेकिन रखरखाव पर सवाल
राजधानी में सबवे का निर्माण सड़क हादसों को रोकने और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन कई स्थानों पर नियमित रखरखाव न होने से यह सुविधाएं अपनी कीमत खोती जा रही हैं। कहीं सीढ़ियां टूटी हुई हैं, तो कहीं दीवारों पर प्लास्टर उखड़ रहा है। कई सबवे में पानी भरने की समस्या बनी रहती है। बरसात के मौसम में स्थिति और बिगड़ जाती है।
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