दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 200 छात्र शामिल हुए
इसमें छठी से 12 वीं कक्षा के दो सौ से अधिक छात्र शामिल हैं। कार्यशाला 30 जून तक सुचारू रूप से चलेगी। कार्यशाला में छात्र आपस में भाईचारा, मानवता, प्रेम और अनुशासन में रहने के तरीके को बताया जा रहा है। यहां छात्रों को गुरुकुल संस्कृति से अवगत कराया जा रहा है। रोहिणी से आए 11 वीं कक्षा के छात्र ने राहुल ने कहा कि उन्हें इसके बारे में स्कूल से पता चला था। गुरुकुल के बारे में पहले केवल सुना ही था, यहां आकर मन को काफी शांति मिल रही है और भारतीय संस्कृति के बारे में पता चल रहा है।
गुरुकुल शिक्षा पद्धति को ही विद्यार्थी के समग्र विकास का आधार मानते हुए वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम और प्रगतिशील बताया है। विद्यार्थी वैदिक ज्ञान-विज्ञान व सर्व कलाओं से संपन्न होकर परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए प्रगति, समृद्धि का संवाहक होता है। यह विचारधारा बच्चों को कम उम्र से ही सिखाई जानी चाहिए। -डॉ. जीतराम भट्ट, निदेशक, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान
मौजूदा समय की आवश्यकता को देखते हुए शिक्षक-छात्र के दोस्ताना संबंध व सम्मान साझा करने का भी यह मंच प्रदान कर रहा है। इसमें छात्रों को एक ऐसा माहौल प्रदान किया जा रहा है जहां छात्र सुरक्षित महसूस करे और देखभाल करने वाले पर भरोसा करते हैं तो वे उसी का अनुकरण करना सीख रहे हैं।