शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के छात्रों में किसी उत्पाद की गुणवत्ता की समझ विकसित करने के प्रयास शुरू किए हैं। इसके लिए सभी सरकारी स्कूलों में जल्द ही स्टैंडर्ड क्लब (मानक क्लब) का गठन किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय का इन क्लब के गठन के पीछे उद्देश्य विज्ञान के छात्रों को गुणवत्ता व मानकीकरण की अवधारणों से अवगत कराना है। निदेशालय ने भारतीय मानक ब्यूरो से प्राप्त पत्र के बाद यह कदम उठाया है।
शिक्षा निदेशालय को जून के पहले सप्ताह में भारतीय मानक ब्यूरो से एक पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र में कहा गया है कि भारतीय मानक ब्यूरो उपभोक्ताओं को एक महत्वपूर्ण हितधारक मानता है, और विभिन्न आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शिक्षित और सशक्त बनाने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में यह स्टैंडर्ड क्लब की स्थापना सैकेंडरी स्कूलों में की जा रही है। जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को यह क्लब स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके माध्यम से छात्रों को उत्पाद की खरीद और गुणवत्ता को लेकर सजग बनाया जाएगा।
इन क्लब में मेंटर केरुप में स्कूल प्रिंसिपल की ओर से नामित एक विज्ञान का शिक्षक और 15 छात्र सदस्य होंगे। मेंटर छात्रों को गुणवत्ता और मानकीकरण पर आधारित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। ब्यूरो प्रत्येक मानक क्लब को एक वर्ष में 3 गतिविधि के लिए प्रति गतिविधि 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। ब्यूरो का 2022-23 के अंत तक 10, 000 क्लब बनाने का इरादा है, जबकि दिल्ली के लिए 500 क्लब स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।