दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज ने प्रार्थना सभा में कम उपस्थित रहने वाले 100 से अधिक छात्रों के निलंबन के आदेश पर यू-टर्न ले लिया है। कॉलेज ने इसे टाइपिंग त्रुटि बताते हुए आदेश वापस ले लिया है। इस संबंध में प्राचार्य ने छात्रों से ईमेल के माध्यम से माफी मांगी है।
प्राचार्य ने ईमेल में कहा है कि अब कोई निलंबन नहीं होगा। प्राचार्य ने खेद जताते हुए कहा कि निलंबन के ईमेल में अनजाने में गंभीर टाइपिंग त्रुटियां आ गई थीं। दरअसल कॉलेज ने शनिवार को 60 फीसदी से कम उपस्थित रहने वाले 100 से अधिक छात्रों को निलंबित करने का आदेश दिया था और परीक्षा देने पर रोक लगा दी थी। छात्रों को इसकी जानकारी 17 को ईमेल के माध्यम से दी गई थी। कहा गया था कि उन्हें अपने अभिभावकों को भी बुलाना है। इस संबंध में कॉलेज के एक प्रोफेसर डॉ. संजीव ग्रेवाल ने प्राचार्य डॉ. जॉन वर्गीज को पत्र लिखकर इस आदेश पर विरोध जताते हुए निलंबन के फैसले को गलत ठहराया था।
कॉलेज में सुबह 9 से 9.30 बजे तक प्रार्थना सभा होती है। सभा में छात्र गीता, बाइबल जैसी पुस्तक की एक लाइन पढ़ते हैं। इसमें छात्रों की 60 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होती है। यह पहले वर्ष के छात्रों के लिए होती है। सभा में पांच मिनट की देरी से पहुंचने वाले को अनुुपस्थित माना जाता है। छात्रों को भेजे गए ईमेल में ही दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं से निलंबित करने के संबंध में लिखा गया था। इसमें अभिभावकों को कॉलेज आने की बात भी कही गई थी। छात्रों ने निलंबन वाले ईमेल के संबंध में प्राचार्य से मिलने का प्रयास भी किया था।
प्राचार्य ने ईमेल में यह लिखा
मंगलवार को कॉलेज प्राचार्य ने छात्रों को एक ईमेल किया। इसमें कहा गया कि 17 फरवरी को मेरे कार्यालय से एक ईमेल भेजा गया था। वह गलत तरीके से लिखा गया था, इसके लिए मैं दिल से माफी मांगता हूं। ईमेल में कहा गया है कि कॉलेज में सुबह की असेंबली कॉलेज की पुरानी परंपरा है। यह कोई धार्मिक आयोजन नहीं है, इसमें कई धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों के छोटे-छोटे अंश पढ़े जाते हैं। कॉलेज सभी जूनियर सदस्यों को सुबह की सभा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। ईमेल में उन्होंने कहा कि सुबह की सभा में उपस्थिति के संबंध में कोई निलंबन नहीं होगा। पहले वाले ईमेल में गंभीर टाइपिंग त्रुटियां आ गई थीं जिसका मुझे खेद है।