ग्राम पटला निवासी अजीत वर्ष 1999 तक लाजपतनगर से यूपी के बीच बचने वाली बस में कंडेक्टर था। इस दौरान वह पश्चिमी यूपी व दक्षिण दिल्ली के गैंगस्टर यशपाल गुर्जर के संपर्क में आया। यशपाल के कहने पर अजीत ने एक हत्या की और दो लोगों को मारने का प्रयास किया। इन मामलों में वह करीब सात वर्ष डासना जेल में बंद रहा। बाद में ये इन मामलों में बरी हो गया था। यशपाल व अन्य को इन मामलों में दोषी ठहराया गया था और अभी जेल में हैं। जेल में अजीत कई बदमाशों के संपर्क में आया। बाद में ये डिंपल त्यागी के गिरोह में शामिल हो गया।
मुठभेड़ में डिंपल त्यागी के मारे जाने के बाद बाहरी दिल्ली के प्रवीण उर्फ परवेज ने पश्चिमी यूपी के कुख्यात गैंगस्टर हितेंद्र उर्फ छोटू और किशन पाल उर्फ फौजी के सक्रिय सहयोग से गिरोह की बागडोर संभाली। आरोपी अजीत ने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ दिल्ली और यूपी में हथियारों के बल पर डकैती और हत्या करना शुरू कर दिया। 2012 में, उन्हें फिर से यूपी पुलिस ने पकड़ लिया और लगभग डेढ़ साल तक जेल में रहा। उसका एक सहयोगी, जो चांदनी चौक क्षेत्र में बैग बेचता था और अपने गिरोह के सदस्यों के संपर्क में था, ने 2014 में पीएस गीता कॉलोनी क्षेत्र के 7.5 किलो सोने की चोरी की गुप्त सूचना दी थी। इस मामले में सभी गिरफ्तार किए गए और 2017 में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरोपी के खिलाफ दस केस दर्ज हैं।