आमतौर पर 60 वर्ष और इससे अधिक उम्र के लोगों में मिलने वाली स्लिप डिस्क की बीमारी युवाओं में बढ़ रही है। सेक्टर 26 स्थित आर्थो न्यूरो फिजियोथेरेपी क्लीनिक के सर्वे में यह पता चला है। कंप्यूटर और मोबाइल उपयोग एवं जिम में शरीर की मुद्रा का ध्यान न रखना इसका बड़ा कारण है।
सर्वे के मुताबिक बीते एक साल में क्लीनिक की ओर से जिले में लगाए गए पेन मैनेजमेंट एवं अर्थराइटिस जांच शिविरों में 2100 मरीज रजिस्टर्ड हुए। इनमें करीब एक हजार लोग पीठ दर्द से पीड़ित थे।
युवाओं की संख्या 600 थी, जिसमें से 216 युवाओं में स्लिप डिस्क की समस्या मिली। क्लीनिक के प्रमुख डॉ. विश्वास विरमानी बताते हैं पीठ दर्द, गले में दर्द और स्लिप डिस्क की समस्या हर उम्र में बढ़ रही है।
बीते 14 साल में शिविरों में 30 हजार रोगी देखे गए हैं। तब से अब तक पीठ दर्द की समस्या से पीड़ित युवाओं की संख्या 20 फीसदी से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। शुक्रवार को सेक्टर 16 स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी में लगे शिविर में 15 युवा पीठ दर्द की समस्या से पीड़ित मिंले। इनमें पांच में स्लिप डिस्क प्रकाश में आया।
क्या है कारण
-वक्त के साथ मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बढ़ा है। लोग लगातार इसका उपयोग करते हैं और इस दौरान शरीर की मुद्रा का ध्यान नहीं रखते।
-कोई भी सामान उठाते वक्त बिना घुटने मोड़े आगे झुकना और झटके से उठना स्लिप डिस्क का अहम कारण है। जिम करने वालों में यह समस्या ज्यादा होती है।
रखे ध्यान-
-जितना समय आपने पीठ को आगे झुकाया है. उतने ही समय पीठ को पीछे की ओर (उल्टे सी) के आकार मे झुकाएं।
-कोई भी चीज उठाते समय घुटने मोड़कर नीचे बैठे और जिस चीज को उठाना है, उसे छाती के पास रखें। उठने के लिए घुटना सीधा करें और फिर उठे।
-जिम में वजन उठाते जिम बेल्ट को कमर में बांधे।
-कुछ उठा रहे हैं तो सांस बाहर छोड़े। सांस रोके नहीं।
क्या है स्लिप डिस्क
रीढ़ की हड्डी में 33 हड्डियां होती हैं। इन्हें बीच में लचीला बनाए रखने के लिए डिस्क होती है। रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ने पर डिस्क खिसक जाती है और यह समीप से गुजरने वाली नस (शियाटिक नर्व) को दबाती है, जिससे कमर से लेकर पैर तक में काफी दर्द होता है। इसे स्लिप डिस्क कहते हैं।