तीन कार्यकाल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में चुना है। इसकी औपचारिक घोषणा गुरुवार शाम को कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से कर दी।
हालांकि कुछ समय पहले तक 78-वर्षीय शीला दीक्षित इस बात से असहमत लग रही थीं और उत्तर प्रदेश जाकर चुनाव लड़ने को वे हारी हुई बाज़ी खेलने जैसा मान रही थीं। यही कारण है कि उन्होंने इस पेशकश को ठुकरा भी दिया था।
यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस ने संजय सिंह को समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया है वहीं आरपीएन सिंह उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इस कमेटी में श्रीप्रकाश जायसवाल, रीता बहुगुणा, सलीम शेरवान, प्रदीप जैन आदित्य, पीएल पुनिया निर्मल खत्री के नाम शामिल हैं।
सीएम उम्मीदवार के तौर पर शीला दीक्षित ने कहा कि हम एकजुट होकर मेहनत करेंगे। हर चुनाव चुनौती होता है कोई बड़ी चुनौती होता है कोई छोटी होती है। हम हिम्मत से जाएंगे इस विश्वास से जा रहे हैं कि इस बार जीत कर आएंगे। यूपी में चारों पार्टियों से टक्कर है।
खुद पर लगे आरोपों को भी शीला दीक्षित ने दरकिनार कर दिया। यूपी में कांग्रेस की सीएम पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित ने कहा कि प्रदेश में अगर मौका मिलेगा तो वह वहां दिल्ली की तर्ज पर ही विकास करेंगी।
कांफ्रेंस में शीला दीक्षित पर लगे उनके आरोपों का बचाव करते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी के तीन मुख्यमंत्रियों पर भी कई आरोप हैं। अगव वो इस्तीफा देते हैं तो हम अपने यूपी के चेहरे को वापस ले लेंगे।
दिल्ली का तजुर्बा आएगा काम
शीला दीक्षित
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अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस रणनीति तैयार करने में जुटी हुई है। प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका को लेकर भी काफी विचार-विमर्श जारी है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ही पार्टी के शीर्ष नेता हैं। अब तक के चुनावों में प्रियंका ने इन्हीं दोनों के चुनाव क्षेत्रों क्रमशः रायबरेली और अमेठी में पार्टी के लिए प्रचार किया है, लेकिन मांग है कि प्रियंका राज्य के अन्य हिस्सों में भी प्रचार करें और चुनाव लड़ें भी।
2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को जिताने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस बार कांग्रेस से जुड़े हैं। उनकी टीम के सूत्रों के अनुसार, वह राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई ब्राह्मण चेहरा चाहते हैं, जिसमें शीला दीक्षित फिट बैठती हैं।
इसके अलावा प्रशांत किशोर के मुताबिक दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में उनका तजुर्बा उत्तर प्रदेश के लोगों को भी लाभान्वित कर सकता है, जो अपने राज्य के पिछड़ेपन से दुःखी हैं।