फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शीला की विदाई से युवा नेतृत्व की लगेगी लॉटरी

Wed, 05 Mar 2014 01:27 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
कांग्रेस की सबसे मजबूत मुख्यमंत्री और दिल्ली में जीत की हैट्रिक लगाने वाली शीला दीक्षित की केरल के राज्यपाल के तौर पर दिल्ली से रवानगी हो रही है। शीला की सम्मानजनक विदाई के साथ दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
विज्ञापन



दिल्ली में अभी तक लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा, कांग्रेस का चेहरा शीला दीक्षित थीं। 3 दिसंबर 1998 को सुषमा स्वराज से दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने के बाद दीक्षित ने सात लोकसभा सीटों में से एक पर सिमटी कांग्रेस को 2004 में 6 सीट और 2009 में सात सीट तक पहुंचा दिया।

पढ़ें: शीला को मिला हार का तोहफा, बनीं राज्यपाल

इतना ही नहीं इस बीच तीन बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। नवंबर, 2013 में सबसे लंबे कार्यकाल वाली मुख्यमंत्री बन गईं। इस बीच दिल्ली में कांग्रेस के बाकी चेहरे दब गए, जिसने आवाज उठाई उन्हें किनारे कर दिया गया।
विज्ञापन


शीला दीक्षित पहली बार 1984 में यूपी के कन्नौज से सांसद बनीं और 1986-89 तक केन्द्रीय राज्यमंत्री भी रहीं। हालांकि 1998 में भाजपा के सांसद बीएल शर्मा के अचानक इस्तीफा देने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा नेता लाल बिहारी तिवारी ने शीला को हराया।

पढ़ें: कांग्रेसी नेता ने फांसी लगाकर दी जान

फिर विधानसभा चुनाव हुए तो शीला ने गोल मार्केट से कीर्ति आजाद को हराकर जीत दर्ज की। अब अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित को नई दिल्ली विधानसभा सीट से बड़े मार्जिन से हराया।

प्रदेश चुनाव से जुड़े नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि बाद में विधानसभा चुनाव होते हैं तब भी दिल्ली का नेतृत्व युवा हाथ में ही होगा। वह यह भी मान रहे हैं कि 15 साल से किसी अन्य नेता के नहीं उभरने का संकट भी अब खत्म होगा।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें