वहीं संक्षिप्त सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता अहमद इब्राहिम ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कई मामले मुख्य रूप से भाषणों से संबंधित हैं जो वर्तमान आपराधिक जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि शरजील जमानत पाने का हकदार है क्योंकि उसके भागने की संभावना नहीं है, न ही गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का जोखिम है। जहां तक यूएपीए की धारा-13 के तहत आरोप का सवाल है, अपने भाषणों में शरजील इमाम ने हिंसा या हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने के लिए कोई काम नहीं कया।
विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने आपत्ति जताई और कहा कि कार्यवाही जारी रखने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। मामले में औपचारिक और तकनीकी विशेषज्ञ गवाह हैं। उनकी जांच से मामले में कोई पक्षपात नहीं होगा। फिजिकल गवाहों की परीक्षा के लिए अदालत उस विशेष चरण में फैसला कर सकती है। उन्होंने कहा कि अंतरिम जमानत के लिए अदालत को अपराध की गंभीरता पर विचार करना होगा।
शरजील इमाम पर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) पर सरकार के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, विशेष रूप से दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में, जिसके कारण कथित तौर पर विश्वविद्यालय के बाहर के क्षेत्र में हिंसा हुई। शरजील अपने कथित भड़काऊ भाषणों के लिए देशद्रोह के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं। वह जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।