जम्मू- कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से कश्मीरियत को कोई खतरा नहीं है। मोदी सरकार कश्मीरियत को बचाना और आगे बढ़ाना चाहती है। कश्मीरियत को आगे बढ़ाने के लिए शोध की बेहद जरूरत है। इसलिए मैं जेएनयू से आग्रह करता हूं कि वे कश्मीरियत को बढ़ाने पर आधारित शोध करें। ये बातें केंद्रीय मंत्री और उधमपुर के सांसद जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को जेएनयू में कहीं।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कैंपस में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू- कश्मीर में शांति और विकास विषय पर लेक्चर आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार के दृढ़ निश्चय के चलते अनुच्छेद 370 हटाना संभव हो पाया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पांच अगस्त के बाद बेशक थोड़ा कर्फ्यू जैसा माहौल था, लेकिन घाटी में अमन चैन कायम है। महिलाओं, युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए खास रोडमैप तैयार किया गया है। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी पर खास फोकस है।
कुछ लोग गलत जानकारियां देश और दुनिया तक पहुंच रहे हैं। अनुच्छेद 370 का फायदा कुछ परिवारों को था। इसी के आड़ में आतंकवाद फैल रहा था। हालांकि अब माहौल बदल गया है। केंद्रीय मंत्री ने करीब 45 मिनट तक छात्रों को नए कश्मीर और नए भारत की तस्वीर पेश की।
एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठन आमने-सामने
ऑडिटोरियम के बाहर एक ओर एबीवीपी समर्थक हाथों में स्लोगन लेकर अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन कर रहे थे। इसके अलावा एबीवीपी समर्थकों ने जब वंदे मातरम, भारत माता की जय, मोदी जिंदाबाद के नारे लगाए तो वामपंथी छात्र संगठन और जेएनयू छात्रसंघ ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया। वामपंथी छात्र संगठनों ने केद्र के खिलाफ नारे भी लगाए। इस दौरान जेएनयू छात्रसंघ ने मंत्री से कैंपस से लापता नजीब अहमद के मसले पर जवाब मांगा। एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों में विरोध होता रहा। छात्र संगठनों में थोड़ी झड़प भी हुई।