अप्रैल की शुरुआत में भी स्कूलों में बम होने की धमकी ई-मेल या फोन के माध्यम से दी गई। जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने एक एक्शन प्लॉन तैयार कर दिशा-निर्देशों के रूप में स्कूलों को भेजा था। ताकि दोबारा बम की धमकी मिलने पर एक सिस्टम के तहत से स्कूलों में काम किया जा सके। दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि बम की धमकी मिलने पर इसकी सूचना पुलिस को देनी है, न खुद घबराना है और न ही बच्चों को घबराने देना है।
स्कूलों ने इन दिशा-निर्देशों को लेकर बीते दिनों अपने-अपने स्कूलों में चर्चा की थी। वहीं स्कूलों ने भविष्य में ऐसी घटनाएं सामने आने पर कुछ दिनों पहले ही बच्चों को सुरक्षित एरिया में लाने का प्लान बनाया था। स्कूल परिसर में जहां अनावश्यक वस्तुएं होती हैं उन्हें दिशा-निर्देशों के बाद हटा दिया गया था। स्कूल परिसर में अलग से प्रवेश व निकास की व्यवस्था भी की गई थी। कुछ स्कूलों ने केंद्रीयकृत अलार्म प्रणाली को भी स्थापित कर लिया था। स्कूल का लेट आउट प्लान भी तैयार कर लिया था, जिससे कि बच्चों को सुरक्षित निकालने में दिक्कत न हो। कुछ स्कूल तो ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पहले ही मॉक ड्रिल कर चुके थे, इसलिए उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
मयूर विहार स्थित विद्या बाल भवन स्कूल के प्राचार्य डॉ. सतबीर शर्मा ने कहा कि बीते दिनों आए दिशा-निर्देशों को लेकर स्कूल में चर्चा की गई थी। हमने ऐसी घटना सामने आने पर बच्चों को कैसे सुरक्षित बाहर निकालना है, उसके लिए एक सुरक्षित प्लान बना लिया था। दिशा-निर्देशों का लाभ ही हमें बुधवार को मिला। एक तरह से हम पहले से ही ऐसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हो गए थे।
बचाव के लिए यह दिशा-निर्देश जारी किए गए थे
- किसी बाहरी व्यक्ति के स्कूल में प्रवेश को रोकने के लिए बाड़ लगाया जाए
- स्कूल में जहां बम छिपाए जाने की आशंका हो वहां से अनावश्यक वस्तुओं को हटाया जाए।
- भगदड़ न हो इसके लिए निकास व प्रवेश अलग-अलग हो।
- स्कूल की इमारत का ले-आउट हमेशा तैयार रहे, जिससे इमरजेंसी में उसे पुलिस, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ व बचाव दल के साथ साझा किया जा सके।
- सीसीटीवी की मदद से निगरानी की जाए, केन्द्रीयकृत अलार्म प्रणाली स्थापित की जाए।
- पुलिस के साथ स्कूल मॉक ड्रिल करें।