निर्वाचन आयोग की हिदायत के अनुसार पंचायतीराज संस्थाओं का आम चुनाव चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को शिक्षा संबंधी शर्त को पूरा करने के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त उसमें अगर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट यानी एसएलसी लगाया, तो उनको उस पर जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी अथवा खंड शिक्षा अधिकारी का काउंटर साइन कराना होगा।
चुनाव की शिक्षा संबंधी शर्त को लेकर अब यह साफ हुआ है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी व केंद्रीय विद्यालय शिक्षा बोर्ड, दिल्ली की ओर से जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को छोड़कर अन्य सभी शिक्षा संबंधी प्रमाण पत्रों का प्रमाणन शिक्षा विभाग के अधिकारी काउंटर साइन करके करेंगे।
दूसरे राज्यों के शिक्षण संस्थानों अथवा बोर्डों की ओर से जारी प्रमाण पत्रों पर भी संबंधित राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारी काउंटर साइन करेंगे।
इसके अलावा विरान्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड, ओपन बोर्ड अन्य बोर्ड के प्रमाण-पत्र भी हरियाणा शिक्षा बोर्ड की तरह अपने प्रमाण-पत्रों की वैधानिकता जांचने का अधिकार उन्हीं के पास रहेगा।
बता दें कि राजस्थान विधानसभा के चुनाव के दौरान शिक्षा संबंधी शर्त लागू करने के बाद काफी लोगों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र जांच के दौरान फर्जी पाए गए।
इस बार चूंकि हरियाणा की मनोहर लाल सरकार ने भी पंचायत आम चुनाव में शिक्षा संबंधी शर्त लागू की, इसलिए पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव लड़ने वाले उमीदवारों के शिक्षा संबंधी प्रमाण पत्रों की भी समुचित जांच कराई जा रही है।
उधर विकास एवं पंचायत विभाग के सचिव भी ऐसे उमीदवारों को चूल्हा टैक्स की पांच साल के बकाया की रसीद 100 और 150 रुपए काटकर दे रहे हैं।
यह बकाया भी अधिकांश उम्मीदवारों पर कई सालों से लंबित चला आ रहा है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के रक्त समुह की जानकारी भी हासिल करने के लिए सरकारी अस्पताल में उम्मीदवारों की कतार लगी हुई है, जहां वे अपने खून की जांच कराकर उसकी रिपोर्ट के आधार पर अपना ब्लड ग्रुप नामांकन में दर्ज करा रहे हैं।