डाल्फिनों को बचाने के लिए बड़ी कवायद शुरू हुई है। गंगा में (बुलंदशहर क्षेत्र) डॉल्फिन सेंचुरी रेंज में नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में नहीं डाला जाएगा।
इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर अनूपशहर और नरौरा के बीच डाल्फिन सेंचुरी रेंज में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करेगी। हाल ही में गंगा में मृत मिली डाल्फिन की घटना के बाद अफसरों में हड़कंप मचा है।
सरकारी स्तर पर तेज हुई कवायद में जल निगम ने दोनों में एसटीपी प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेज दी है।
दरअसल, गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा तक के क्षेत्र को केंद्र सरकार ने रामसर साइट घोषित कर रखा है। यह क्षेत्र डाल्फिन संरक्षण के लिए चिह्नित है। डाल्फिन संरक्षण और उन पर रिसर्च के लिए यहां टोक्यो यूनिवर्सिटी का दल, आईआईटी रुड़की, आईआईटी दिल्ली, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था के विशेषज्ञ काम कर रहे हैं।
लंदन का एक बैंक भी रिसर्च में मदद कर रहा है। वर्ष 1999 में अध्यन का काम शुरू करते समय यहां डाल्फिन की संख्या 25 थी, जो अब बढ़कर 56 हो गई है। लेकिन 3 साल में तीन युवा डाल्फिन की मौत विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन रही हैं।
गंगा से सटे अनूपशहर और नरौरा के नालों का पानी गंगा में पहुंच रहा है। डाल्फिन सेंचुरी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अब दोनों स्थानों पर सीवर प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे।