सरिता विहार में हुए माया (बदला हुआ नाम) हत्याकांड की साजिश तिहाड़ जेल में रची गई थी। झपटमारी और चोरी के मामले में आरोपी दिनेश तिहाड़ जेल में बंद था। वहां उसकी मुलाकात धीरेंद्र से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। इस बीच जेल में बंद बुराड़ी निवासी बंटी से धीरेंद्र की लड़ाई हो गई। दिनेश व धीरेंद्र ने बंटी को सबक सिखाने के लिए जेल में साजिश रची। जेल से बाहर आने के बाद दोनों दो माह तक एक साथ रहे। दिनेश ने बंटी को सबक सिखाने की पूरी साजिश रच ली।
सबसे पहले दिनेश ने मुरादाबाद से एक मोबाइल फोन व सिम खरीदा। साजिश में एक अन्य दोस्त सौरभ भारद्वाज को शामिल किया। साजिश को अंजाम देने के लिए चारे के रूप में एक युवती की दिनेश को जरूरत थी। दिनेश ने अपनी एक जानकार युवती माया को नौकरी दिलाने की बात कर संगम विहार स्थित अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां सौरभ, धीरेंद्र और दिनेश ने युवती को जबरन बंधक बना लिया। रात को युवती के साथ तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया।
बाद में युवती को छोड़ने के बदले उससे एक पत्र लिखवाया, जिसमें बंटी के भाई आरुष व संगम विहार के दो युवकों के नाम लिखवाए गए। इसके बाद माया के मोबाइल से तीनों युवकों (जिनके नाम लिखे गए थे) को फंसाने के लिए माया के मोबाइल से ही कॉल की गई। पत्र लिखवाने के बाद देर रात को युवती की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। शव को ठिकाने लगाने के लिए एक कार का इंतजाम किया गया। वहीं दो लड़कों चंदरकेश व रहीम को चार हजार रुपये देने की बात कर शव को ठिकाने लगाने के लिए बुलाया गया।
देर रात को सभी ने पहले शराब पी, बाद में एक बोरे में माया का शव डालकर उसी कार की डिग्गी में रखा गया। शव को ठिकाने लगा दिया गया। दिनेश ने जो सिम और मोबाइल खरीदा था, उसे नाले में फेंक दिया गया। पुलिस ने दिनेश की निशानदेही पर नाले में फेंका गया मोबाइल, पत्र लिखने में इस्तेमाल पेन, टेप और कार (जिससे शव को ठिकाने लगाया गया) बरामद कर ली। पुलिस को मामले में धीरेंद्र की तलाश है।
सीरियल देखकर की थी तैयारी
पुलिस की पूछताछ में आरोपी दिनेश ने बताया कि उसने टीवी सीरियल देखकर हत्याकांड को अंजाम देने की साजिश रची थी। इसके लिए बाकायदा तैयारी की गई। वारदात को कैसे अंजाम देना है उसकी साजिश रचकर मोबाइल व सिम मुरादाबाद से खरीदा गया। वारदात में युवती को बुलाने के लिए उसी मोबाइल का इस्तेमाल किया। तीनों युवकों को फंसाने के लिए युवती के मोबाइल से कॉल की गई। हत्या करने के बाद खरीदा गया मोबाइल नाले में फेंक दिया गया। दिनेश को यकीन था कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। बंटी के भाई आरुष को फंसाने के बाद धीरेंद्र और दिनेश उसकी बुराड़ी में तीन सौ गज की प्रॉपर्टी भी हड़पने के चक्कर में थे।