किसानों पर दर्ज झूठे मामले बगैर शर्त हो वापस
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश सहित दूसरे राज्यों में हजारों किसानों को झूठे मामलों में फंसाया गया है। मोर्चा ने उनपर दर्ज मामले रदद् करने की मांग की है। परिवारों को मुआवजे और रोजगार के अवसरों के साथ समर्थन दिया जाना है। शहीदों को भी संसद सत्र में श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और उनके नाम पर एक स्मारक बनाया जाना चाहिए। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश आदि विभिन्न राज्यों में हजारों किसानों के खिलाफ सैकड़ों झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी मामले बगैर शर्त वापस लेने की भी किसानों ने मांग की है।
लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपियों पर हो कार्रवाई
लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में किसानों की हत्या के मामले केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार कर केंद्रीय मंत्रि परिषद से बर्खास्त करने की संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की है। शुक्रवार को जब प्रदर्शनकारी किसानों की जीत का जश्न मना रहे थे, उस दौरान भाकियू कादियां संघ के मलोट (पंजाब) के जसविंदर सिंह की मृत्यु हो गई। 26 नवंबर 2020 से वह टीकरी मोर्चा पर डटे हु थे। इस आंदोलन के लिए जीवन तक गंवा देने वाले किसानों को याद रखते हुए किसानों का यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर 26 नवंबर को अलग-अलग राज्यों में किसान टैक्टर और बैलगाड़ियों का जुलूस निकालकर आंदोलन को धार देंगे। शनिवार को एक बयान जारी कर मोर्चा ने कहा कि दिल्ली से दूर के राज्यों की राजधानियों में ये जुलूस निकाले जाएंगे। मोर्चा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन काले कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है लेकिन वह किसानों की अन्य मांगों पर चुप रहे।
एसकेएम ने कहा, आंदोलन के दौरान 670 किसान शहीद हुए लेकिन भारत सरकार ने अब तक उनके बलिदान का संज्ञान नहीं लिया है। इन शहीदों के परिवारों को मुआवजा और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। शहीद किसानों को संसद के सत्र के दौरान श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और उनकी याद में एक स्मारक बनाया जाए। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश तथा दूसरे राज्यों में हजारों किसानों पर मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाए।