अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी है। वहीं, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत पांच फरवरी तक बढ़ा दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष सीबीआई न्यायाधीश एमके नागपाल ने आरोपी व्यक्तियों के लिए सीबीआई कार्यालय में दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर देने से इनकार करते हुए कहा कि सभी को पर्याप्त समय दिया गया है। यह भी कहा कि आरोप तय करने के लिए मामले को बहस के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। इस बिंदु पर आरोपियों के वकीलों ने कहा कि सीबीआई ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है। इसके बाद कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी ताकि आरोपों पर बहस शुरू की जा सके। वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई की ओर से जांच की स्थिति साफ नहीं की गई है। इस बीच, जांच अधिकारी द्वारा एक नई अनुपालन रिपोर्ट दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि खोज सूची प्रदान की गई है।
कोर्ट ने सीबीआई को यह निर्देश देने से इनकार कर दिया कि वह मनीष सिसोदिया के आवास और कार्यालय की तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज उन्हें मुहैया कराए। सिसोदिया के वकील ने कहा कि उन्हें तलाशी सूची तो मिली है, लेकिन तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज नहीं मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को यह देखना चाहिए कि तलाशी कानूनी थी या अवैध। कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों को उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है।
26 फरवरी को गिरफ्तारी, कैबिनेट से इस्तीफा
बता दें कि सिसोदिया को 26 फरवरी को 'घोटाले' में उनकी कथित भूमिका के लिए सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। तब से वह हिरासत में हैं। ईडी ने तिहाड़ जेल में उनसे पूछताछ के बाद 9 मार्च को सीबीआई की एफआईआर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने 28 फरवरी को दिल्ली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि इस मामले में विपक्षी दल भाजपा और दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी के बीच जमकर सियासी बयानबाजी भी होती है।
सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर चुका सुप्रीम कोर्ट
मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लग चुका है। घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने समीक्षा याचिकाएं खारिज की थीं।