रोबोट की मदद से घुटनों का हुआ रिप्लेसमेंट
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साकेत स्थित एक निजी अस्पताल ने पहली बार रोबोट की मदद से घुटनों की सीमेंटलेस मीडियल पिवल रिप्लेसमेंट(कृत्रिम अंग को हड्डी से जोड़ने के लिए सीमेंट का उपयोग नहीं) सर्जरी का दावा किया। झारखंड के रहने वाले 52 वर्षीय मरीज को बीते आठ साल से घुटनों में गंभीर दर्द की समस्या थी। मरीज की जांच में एडवांस्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस का पता चला।
साथ ही डीफॉर्मिटीज जैसे वेरस (बो-लेग्ड) और फ्लेक्सियन (मुड़े हुए घुटने) भी हो गया था। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें घुटने बाहर की ओर मुड़े हुए और पैर धनुषाकार दिखाई देते हैं। अस्पताल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के चेयरमैन डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने कहा कि गर्व है कि दुनिया में इस सर्जरी को हमने सबसे पहले अंजाम दिया है। यह सर्जरी जॉइंट रिप्लेसमेंट का भविष्य है। मरीज कई साल से घुटनों की गंभीर परेशानी से जूझ रहा था, जिससे उसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया था। धनबाद के स्थानीय अस्पतालों में इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था।
पारंपरिक सीमेंटेड इम्प्लांट की तुलना में सीमेंटलेस सर्जरी में इम्प्लांट के आसपास हड्डियों को प्राकृतिक रूप से बढ़ने का मौका दिया जाता है, जिससे नतीजे ज्यादा स्थायी रहते हैं। इस इम्प्लांट के सिंगल-रेडियस और क्रूशिएट-रिटेनिंग डिजाइन से घुटनों में बिलकुल प्राकृतिक जोड़ जैसा ही अनुभव होता है। इससे मरीज के लिए चलना-फिरना ज़्यादा सुगम होता है।
उन्होंने बताया कि क्यूविस रोबाटिक सिस्टम के साथ सर्जरी की गई। इससे ऑप्टिमल अलाइनमेंट और प्रिसाइज प्लेसमेंट सुनिश्चित करने में मदद मिली। मरीज के बायोमैकेनिक्स के हिसाब से रिकवरी प्लान तैयार किया गया। इस प्रक्रिया से न केवल जॉइंट फंक्शन बेहतर होता है बल्कि ठीक भी जल्दी होता है। मरीज कम दर्द एवं ज्यादा आत्मविश्वास के साथ रोजाना की गतिविधियों में सक्षम हो पाता है।