साइबर सिटी की बेशकीमती जमीन पर भूमाफिया कब्जा जमाए बैठे हैं। इसका खुलासा नगर निगम की रिपोर्ट में हुआ है। निगम के 47 गांवों में करीब 670 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है।
सबसे अधिक कब्जा पॉश एरिया से लगते गांवों में है। यहां बड़े भू-माफिया कमर्शियल गतिविधियां चला रहे हैं। नगर निगम के सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।
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उधर, नगर निगम ने इस जमीन को कब्जा मुक्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। निगमायुक्त के अनुसार जमीन को कब्जा मुक्त कर आने वाले दिनों में कुछ बेहतरीन परियोजनाएं शुरू की जाएगी।
वर्ष 2008 में नगर निगम के गठन कर 47 गांवों को शामिल किया गया। इनमें से छह गांव बेचिराग (जहां आबादी न हो) हैं। निगम में शामिल होने के बाद इन गांवों की 3663 एकड़ पंचायती जमीन नगर निगम की संपत्ति हो गई।
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इस जमीन की 18.26 फीसदी पर आज भी अवैध कब्जा बरकरार है। निगम गठन के करीब छह साल बाद भी इन कब्जों को हटवाया नहीं जा सका है।
नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार ये कब्जे पंचायत के समय से ही चले आ रहे हैं। बड़े भूमिया सरकारी जमीन पर कमर्शियल गतिविधियां चला रहे हैं। नगर निगम ने ऐसी पूरी जमीन चिह्नित कर ली है। इस जमीन को कब्जा मुक्त करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
सबसे अधिक कब्जा नाथूपुर में
निगमायुक्त के अनुसार सबसे अधिक कब्जा डीएलएफ फेस तीन से लगते एवं दिल्ली बॉर्डर से सटे नाथूपुर गांव में है। यहां 91.31 एकड़ जमीन आज भी भूमाफियाओं के कब्जे में है। अवैध कब्जे से मेयर विमल यादव का गांव भी अछूता नहीं है। मेयर के गांव सरहौल में 17.86 एकड़ जमीन पर कब्जा है। झाड़सा, चकरपुर, सिकंदरपुर, कादीपुर, बादशाहपुर, सिलोखरा, तिघरा, सुखराली जैसे गांवों में भी अवैध कब्जों की भरमार है।
रिहायशी और कमर्शिलय साइट होंगी विकसित
नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि पूरी जमीन को कब्जा मुक्त कर लोगों के लिए रिहायशी और कमर्शिलयल साइट विकसित करने की योजना है। पूरी योजना बनाकर सरकार को भेज दी है। यहां बहुमंजिला भवनों का निर्माण कर लोगों को आधुनिक रिहायश मुहैया कराई जा सकती है। इन्हीं अपार्टमेंट में उनके लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक पहल होगी।